बाराबंकी। नामांकन शुरू होने में दस दिन बाकी हैं पर अभी तक सत्तारूढ़ दल भाजपा में किसी को मैदान में उतरने की हरी झंडी नहीं मिली है। वर्तमान माननीय जहां पांच साल के कार्यकाल का लेखाजोखा लेकर दोबारा चुनावी समर में उतरने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। तो पार्टी में ही टिकट के दावेदारों से कईयों को कड़ी चुनौती मिल रही है।
शीतलहर में टिकट को लेकर सबसे ज्यादा माहौल गर्म है। चर्चाओं का बाजार ऐसा है कि एक दूसरे पर कीचड़ उछालने से भी कुछ दावेदार बाज नहीं आ रहे हैं। लखनऊ के बाद टिकट को लेकर दिल्ली की दौड़ भी तेज हो गई है। पार्टी में भगदड़ के बाद कई माननीयों को जैसे संजीवनी मिल गई है। उनके समर्थक जहां उत्साहित हैं वहीं टिकट के प्रबल दावेदारों ने भी अपनी रणनीति बदलकर पैरवी तेज कर दी है।
जिले में चार सीटों पर भाजपा के विधायक हैं और दो पर सपा का कब्जा है। सभी सीटों पर टिकट के दावेदारों की संख्या करीब 75 हैं। इनमें से कुछ पुराने दावेदार हैं तो कुछ दूसरे दलों से आए नेता भी ताल ठोंक रहे हैं। कुर्सी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी हाईकमान किस पर दांव लगाएगा यह अभी स्पष्ट नही है। अपनी मजबूत पकड़ के बावजूद यहां के माननीय के खिलाफ दावेदारों की संख्या इतनी है कि लोग कयास लगा रहे हैं कि इस बार किसके सिर टिकट का सेहरा बंधेगा यह कहना आसान नहीं है।
यहां के कुछ दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। अपनी उपलब्धियों के साथ दूसरों की खामियां भी गिनाने में बाज नही आ रहे हैं। दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में टिकट पाने वालों की लम्बी फेहरिस्त नहीं है फिर भी अभी तक पार्टी ने स्पष्ट तौर पर किसी को घोषित नहीं किया है। पार्टी के जन विश्वास यात्रा में भीड़ जुटाकर माननीय ने जो शक्ति प्रदर्शन किया उस पर प्रदेश अध्यक्ष ने जिस तरह माननीय की पीठ ठोंकी उससे अन्य दावेदार ढीले जरूर पड़ गए।
टिकट को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी रामनगर में देखने को मिल रही है। यहां पर धनबल और बाहुबल के अलावा ऊंची पकड़ रखने वाले ताल ठोंक रहे हैं। कई दावेदारों के बीच तो ऐसा व्यवहार देखने को मिला कि पार्टी की साख को ठेस पहुंची है। चर्चाओं के बीच टिकट कटने और मिलने की दौड़ भी सर्वाधिक यहीं देखने को मिल रही है।
कई उम्मीदवार लखनऊ से दिल्ली एक किए हुए हैं तो पार्टी के नेता भी लामबंद नजर आ रहे हैं। खेमेेबंदी भी यहां कम नही है। इसका नजारा भी कई पार्टी के कार्यक्रमों में साफ देखा गया है। बाराबंकी सीट पर भी कम मारामारी नहीं है। हालांकि यहां की सीट कभी भी भाजपा के पास नहीं रही है।
यहां के दावेदार अपना सजातीय वोटों पर पकड़ से लेकर पार्टी और संगठन में अपने योगदान को गिनाकर टिकट पाना चाहते हैं। करीब 15 टिकटार्थियों में पार्टी किस पर दांव लगाकर पहली बार कमल खिलाने का जिम्मा सौंपेगी, इसे लेकर कई सर्वे और उनकी रिर्पोट्स पर मंथन किया जा रहा है।
हैदरगढ़ सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के माननीय भी टिकट के लिए चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। वह कैसे तोड़ेंगे इसे लेकर दिन रात एक किए हैं। अन्य दावेदार भी अपनी जीत और मतदाताओं पर पकड़ की गणित बताकर सिर्फ स्वयं जीतने का ही संकल्प नेताओं की चौखट पर सुना रहे हैं। जिले की दूसरी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र जैदपुर में 2017 में कमल खिला था। किंतु यहां के विधायक के सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में यह सीट सपा की झोली में चली गई थी। यहां पर भी टिकट पाने के लिए पार्टी के कई बड़े चेहरे प्रयासरत हैं।
कुछ मैदान में हैं तो कुछ पर्दे के पीछे चुनाव चिन्ह हासिल करने के लिए लगे हुए हैं। इस तरह सत्तारूढ़ दल में टिकट को लेकर मचा घमासान कहां तक जाएगा यह तो सूची आने के बाद पता चलेगा। पर इतना साफ है जिसको भी टिकट मिलेगा वह अभी और बाद में भी अपनों को अपना बनाना आसान नहीं होगा। (संवाद)