बाराबंकी। नामांकन की तिथि धीरे-धीरे नजदीक आती जा रही है। कोरोना के चलते चुनाव प्रचार सड़कों पर दिख नहीं रहा है। क्षेत्र में सीधे और सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने और कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा किया जा रहा है। पर अभी भी समाजवादी पार्टी समेत कई बड़े दल ऐसे हैं जिन्होंने उम्मीदवारों का एलान नहीं किया है।
ऐसे में सपा के कई दिग्गज और वर्तमान विधायक भी टिकट को लेकर मची उठापटक में फंसे हुए हैं। इनमें कई तो ऐसे हैं जो कभी स्वयं प्रदेश भर में टिकट बांटते थे। पर समय का फेर की आज उन्हें ही टिकट के लिए कई घरों को ताकना पड़ रहा है।
बाराबंकी विधानसभा क्षेत्र में लगातार दो बार सपा का परचम लहराने वाले विधायक धर्मराज यादव उर्फ सुरेश जीत की हैट्रिक लगाने के लिए दौड़भाग तेज कर रहे हैं। इनके मुकाबले में टिकट मांगने वाले कुछ लोग मैदान में दिख रहे हैं तो कुछ लोग पर्दे के पीछे ही अपनी ताकत लगा रहे हैं।
जानकार कहते हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने विधायकों की छवि का सर्वे कराया है, उसी हिसाब से टिकट मिलेगा। इसी सवाल पर सब अपना अलग-अलग दावा कर रहे हैं। कुर्सी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री समेत करीब 29 पार्टी के कार्यकर्ता विधायकी का टिकट पाने के लिए महीनों से शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।
यहां पर प्रधानों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों से पत्र लिखवाकर टिकट की दावेदारी मजबूत की जा रही है। मैदान में कौन उतरेगा यह तो अभी साफ नहीं है पर कोविड काल में कई उम्मीदवार अपनी उम्मीद लिए गांव-गांव भटकते दिख रहे हैं।
रामनगर विधानसभा क्षेत्र में टिकट के लिए पार्टी से लेकर दूसरे दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। 2017 की तरह ही दिग्गज नेता टिकट पाने को लेकर आमने-सामने हैं। जिले में किस विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का कौन प्रत्याशी होगा यह इन्हीं नेताओं के घर से तय हो जाता था। दूसरे क्षेत्र के नेता इसके लिए लखनऊ के चक्कर नहीं लगाते थे।
इसी ताकत को लेकर दोनों घराने आमने-सामने हो गए। रामनगर किसका होगा इसको लेकर फिर जंग तेज है। यहां दोनों नेताओं को कैसे समायोजित किया जाए इसे लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व मुसीबत में है। दोनों के पास जनाधार और निष्ठा की कमी नहीं है। न ही धनबल और बाहुबल की कमी है। ऐसे में यहां के टिकट को लेकर सर्वाधिक चर्चा की जा रही है। कोई भी हार मानने को तैयार नहीं है।
दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में भी पूर्व मंत्री के मुकाबले कई युवा प्रत्याशी टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं। यह क्षेत्र में जनसंपर्क से लेकर अपनी पार्टी के मुखिया के दरबार तक अच्छी पकड़ रखते हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो कहना मुश्किल है पर टिकट की दौड़ और निष्ठा की होड़ यहां साफ दिखाई पड़ रही है।
आधा दर्जन से अधिक प्रत्याशी सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ दिखाकर समर्थकों को अपने पाले में रखने की कोशिश में जुटे हैं। जैदपुर विस सुरक्षित क्षेत्र में उपचुनाव में जीत दर्ज करने वाले सपा के विधायक के अलावा यहां से पूर्व विधायक रहे कई प्रमुख नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। यहां भी टिकट को लेकर दो बड़े नेताओं के यहां ही टिकटार्थी हाजिरी लगा रहे हैं।
हैदरगढ़ विस सुरक्षित क्षेत्र में पूर्व विधायक से लेकर दो-तीन लोग दावेदारी पेश कर रहे हैं। पर अभी तक किसी भी उम्मीदवार को हरी झंडी नहीं मिली है। इस तरह जिले की छह विस सीटों पर नजर डालें तो सपा के लिए टिकट पाने के लिए उठापटक तेज है। क्योंकि यहां के अधिकांश नेताओं की पकड़ सीधे पार्टी मुखिया तक बताई जाती है। (संवाद)