बाराबंकी। जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा बुधवार को कोविड नियमों के बीच हुई। जिसमें पंजीकृत नौनिहालों के सापेक्ष 33 फीसदी ही परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा छोड़ने वालों की संख्या 6649 रही। जिले में नवोदय की प्रवेश परीक्षा को लेकर प्रत्येक ब्लॉक में एक व दो परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करते हुए करीब 22 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
बुधवार की परीक्षा में पंजीकृत 9877 नौनिहालों को शामिल होना था, जिसके सापेक्ष 3228 ही परीक्षा में शामिल हुए। गैरहाजिर होने वाले बच्चों की संख्या 6649 रही। परीक्षा केंद्रों तक बच्चों को पहुंचाने की जिम्मेदारी ब्लॉकवार खंड शिक्षा अधिकारियों को दी गई थी।
इसके बावजूद काफी कम संख्या में बच्चे परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा केंदों पर कोविड-19 के प्रोटोकाल के तहत इंतजाम किए गए थे। सैनिटाइज व थर्मल स्क्रीनिंग से जांच करने के बाद ही परीक्षा केंद्रों पर बच्चों को प्रवेश दिया गया। डीआईओएस राजेश कुमार व नवोदय के प्राचार्य वीके यादव ने परीक्षा केंद्रो पर पहुंचकर परीक्षा का हाल जाना।
नवोदय की प्रवेश परीक्षा में कक्षा पांच परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले बच्चे शामिल हुए। जिसमें अधिकांश ग्रामीण अंचल के परिषदीय विद्यालय के बच्चे हैं। जो विद्यालयों में बोरी व चटाई पर बैठकर पढ़ाई ही नहीं करते, बल्कि अब तक की परीक्षा भी देते आ रहे हैं। बुधवार को पहली बार जब वह इंटर कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचे तो काफी खुश दिख रहे थे।
उन्हें यह परीक्षा टेबल व बेंच पर बैठकर जो देने का मौका मिला। परीक्षा देकर निकले कुछ बच्चों से बात की तो उन्हें सबसे अधिक खुशी पहली बार टेबल व बेंच पर बैठकर परीक्षा देने की भी थी। तनु ने बताया कि नवोदय की परीक्षा में पहली बार गोले भरने वाला पेपर हुआ, वहीं बेंच पर बैठकर परीक्षा देने में मजा आया।
अनुराग ने बताया कि पहली बार कुर्सी मेज पर बैठकर परीक्षा दी तो ये बहुत अच्छा लगा। अभिषेक ने बताया कि गांव के स्कूल में पढ़ने के समय बेंच व टेबिल पर बैठने की जो इच्छा थी। इस परीक्षा में बैठकर पूरी हुई। निशांत पटेल ने बताया कि नवोदय की परीक्षा अलग तरह की थी। इसमें उत्तर के लिए गोला भरना था। जिसके बारे में अनुभव कम था।