बाराबंकी। दो सौ करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड व 10 हजार के इनामी अतुल वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार जेल भेज दिया है। कई जिलों में रियल स्टेट और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर कंपनी बनाकर हजारों लोगों को ठगने का आरोपी एलआईसी में विकास अधिकारी है।
वह बाराबंकी, बहराइच, अंबेडकरनगर और सीतापुर में कार्यालय खोलकर निवेशकों का करोड़ों रुपया हजम कर गया। उसके इस कारनामे में जिले के कुछ सरकारी अधिकारी और सफेदपोश के शामिल होने की बात भी पुलिस की जांच में सामने आई है। यहीं नहीं करीब 10 हजार निवेशकों से ठगी करने की पुष्टि भी पुलिस ने की है।
एएसपी पूर्णेंदु सिंह ने बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के रफीनगर निवासी अतुल वर्मा एलआईसी में विकास अधिकारी है। यह एक संगठित गिरोह का मास्टरमाइंड है। इसने दर्जनभर कंपनियां बनाई। इन कंपनियों के माध्यम से वर्ष 2019 से शेयर ट्रेडिंग, इन्वेस्टमेंट, माइक्रो फाइनेंस और रियल इस्टेट के क्षेत्र में काम करना शुरू किया।
इन्वेस्टमेंट के क्षेत्र में एग्रीकल्चर सोसाइटी के माध्यम करीब 10 हजार निवेशकों से दैनिक, मासिक व फिक्स डिपॉजिट जमा के रूप में करोड़ों की राशि जुटाई और नियमों को दरकिनार कर इस रकम को शेयर मार्केट व रियल स्टेट के काम में लगा दिया। रियल स्टेट व शेयर मार्केट से कमाई गई रकम से जालसाज ने दिल्ली, कानपुर व लखनऊ में अकूत संपत्ति खरीद ली।
उन्होंने बताया कि काफी समय बीतने के बाद जब निवेशकों ने रुपये वापस मांगना शुरू किया तो इसने बाराबंकी, सीतापुर, बहराइच व अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में खोले अपने कार्यालय बंद कर दिए। अब तक की जांच में कार्यालयों का संचालन करने वाले करीब 20 लोगों का संगठित गिरोह होने की बात सामने आई है।
इसमें एक अधिकारी व एक सफेदपोश का नाम सामने आ रहा है। इस कंपनी में बतौर एजेंट काम करने वाले करीब सौ लोगों ने खुद अपना व रिश्तेदारों का पैसा फंसने को लेकर परेशान घूम रहे हैं। एएसपी ने बताया कि खरीदी गई भूमि से दो से तीन गुना क्षेत्रफल की बेच डाला। जमीन खरीदने वालों को कब्जा नहीं मिला तो उन्होंने इसकी शिकायत मसौली, नगर कोतवाली व बड्डूपुर थाने में में की। वहां इसके कई मामले दर्ज किए गए।
इसके बाद मसौली के प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने विवेचना शुरू की तो इस जालसाजी का मास्टरमाइंड अतुल कुमार वर्मा निकला। जो एलआईसी की रुदौली शाखा में विकास अधिकारी है। वह अपने पिता ओम प्रकाश, सहयोगी शरद वर्मा, संगम वर्मा, राकेश वर्मा व मां मिथिलेश कुमारी वर्मा आदि के साथ मिलकर कंपनी चला रहा था।
एसपी ने इस मास्टर माइंड की गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया। इसके बाद पुलिस ने जब शिकंजा कसना शुरू किया तो उसने कंपनी के कार्यालय बंद कर अभिलेख छुपा दिए। इतना ही कंपनी व सोसाइटी की ऑडिट रिपोर्ट तक गायब कर दी। बुधवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भारतीय जीवन बीमा निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर गिरफ्तार विकास अधिकारी अतुल कुमार वर्मा व उसके भाई हैदरगढ़ शाखा में विकास अधिकारी अमित वर्मा पर कार्रवाई की मांग की।
रिमांड पर लेकर अभिलेख खंगालेगी पुलिस, ईडी को भी देगी सूचना
जेल भेजे गए जालसाज मास्टर माइंड को पुलिस जल्द ही रिमांड पर लेकर अभिलेख खंगालेगी। वहीं ईडी व आयकर समेत अन्य आर्थिक अनुसंधान संबंधी एजेंसियों को सूचना देकर जालसाज की कंपनी व सोसाइटियों की जांच के सहारे दो सौ करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट को खंगालेगी। इसके अलावा इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी करने को पुलिस की टीम लगाई गई है।
कंपनी बनाकर ठगी करने वाले मास्टर माइंड अतुल वर्मा ने 10 हजार निवेशकों की राशि हड़प ली। रियल स्टेट व शेयर मार्केट से करीब दो सौ करोड़ रुपये की रकम से दिल्ली, कानपुर व लखनऊ जैसे शहर में निजी संपत्ति बना ली है। इस गिरोह में एक अधिकारी व एक सफेदपोश का नाम भी सामने आया है। निवेशकों से अपील है कि वह अगर ठगी के शिकार हैं तो संबंधित थाने व एसपी कार्यालय में शिकायत कर रिपोर्ट दर्ज करा सकेंगे।
-पूर्णेंदु सिंह, एएसपी उत्तरी