फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणिनी प्रमुख का मंगल प्रवेश आज

विज्ञापन
शहर में होगी अगुवाई - फोटो : Amarujala
विज्ञापन

जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि ज्ञानमती माताजी का 14 वर्षों के बाद शुक्रवार को जन्मभूमि टिकैतनगर में मंगल प्रवेश होने जा रहा है। यहां पर 21 अप्रैल तक माताजी का प्रवास रहेगा। इस दौरान जैन मंदिर व अन्य स्थलों पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। गणिनी प्रमुख के स्वागत के लिए दिनभर तैयारियां चलती रहीं। 14 वर्षों के बाद अपने जन्म भूमि टिकैतनगर में आगमन पर पूरे नगर सहित आसपास के क्षेत्र में उल्लास है। पूरे नगर को सजाया जा रहा है जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं।

विज्ञापन



सन 1934 की शरदपूर्णिमा के उस शुभ दिन जब चन्द्रमा की शुभ छटा संपूर्ण धरा को अपने आगोश में समेटे थी, तब जनपद के ग्राम टिकैतनगर में बाबू छोटेलाल जी जैन के घर एक कन्या का जन्म हुआ। कौन जानता था कि मां मोहिनी की यह कन्या एक दिन जगत माता बनकर अपने ज्ञान के प्रकाश से सम्पूर्ण विश्व को आलोकित करेगी। वर्तमान में जम्बूद्वीप की पावन प्रेरिका, चारित्र चन्द्रिका, विधानवाचस्पति, तीर्थोद्धारिका, वात्सल्यमूर्ति, युगप्रवर्तिका आदि दर्जनों उपाधियों से विभूषित गणिनी आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी का जीवन अनवरत साधना एवं त्यागमय जीवन का एक अनूठा उदाहरण है।

 

1953 में चैत्र कृष्णा एकम् को श्री महावीर जी में आपने आचार्य श्री देशभूषण जी से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर ‘वीरमती’ नाम प्राप्त किया। उत्कृष्ट साधना एवं कठोर तपस्या का ही यह प्रभाव है कि आपके संपर्क में आने वाला प्रत्येक श्रावक/श्राविका आपके सम्मुख स्वयमेव नतमस्तक हो जाता है। निकलंक जैन ने बताया कि जैन समाज द्वारा 12 अप्रैल को सुबह 7 बजे रेवढा से भव्य शोभा यात्रा के साथ माता जी को मंदिर लाया जायेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें