जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि ज्ञानमती माताजी का 14 वर्षों के बाद शुक्रवार को जन्मभूमि टिकैतनगर में मंगल प्रवेश होने जा रहा है। यहां पर 21 अप्रैल तक माताजी का प्रवास रहेगा। इस दौरान जैन मंदिर व अन्य स्थलों पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। गणिनी प्रमुख के स्वागत के लिए दिनभर तैयारियां चलती रहीं। 14 वर्षों के बाद अपने जन्म भूमि टिकैतनगर में आगमन पर पूरे नगर सहित आसपास के क्षेत्र में उल्लास है। पूरे नगर को सजाया जा रहा है जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं।
1953 में चैत्र कृष्णा एकम् को श्री महावीर जी में आपने आचार्य श्री देशभूषण जी से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर ‘वीरमती’ नाम प्राप्त किया। उत्कृष्ट साधना एवं कठोर तपस्या का ही यह प्रभाव है कि आपके संपर्क में आने वाला प्रत्येक श्रावक/श्राविका आपके सम्मुख स्वयमेव नतमस्तक हो जाता है। निकलंक जैन ने बताया कि जैन समाज द्वारा 12 अप्रैल को सुबह 7 बजे रेवढा से भव्य शोभा यात्रा के साथ माता जी को मंदिर लाया जायेगा।