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दो ईएमओ के सहारे ट्रामा सेंटर, 24 घंटे जांच भी नहीं

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बाराबंकी। जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर का संचालन 10 साल पहले शुरू हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि यहां से रेफर होने वाले मरीजों का इलाज यहीं पर हो सकेगा। अक्सर लखनऊ जाते समय रास्ते में दम तोड़ने वाले मरीजों की जान भी बच सकेगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। शायद आप यह जानकर चौंक जाएं कि ट्रॉमा में छह की जगह केवल दो इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर (ईएमओ) ही तैनात हैं। 24 घंटे जांच की सुविधा भी नहीं मिल रही है। जबकि रोजाना यहां 350 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
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जिला अस्पताल में इमरजेंसी का संचालन होता था। अधिकतर गंभीर मरीज या हादसे में घायल लोगों को लखनऊ के केजीएमयू या डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया जाता था। आम नागरिकों व जनप्रतिनिधियों की पुरजोर मांग के बाद 10 साल पहले जिला अस्पताल परिसर में ही ट्रॉमा सेंटर का संचालन शुरू किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि ट्रॉमा सेंटर में इलाज तो होगा ही 24 घंटे जांच की सुविधा मिलेगी। मगर 10 साल बीतने को है। ट्रॉमा सेंटर से लोगों को निराशा हाथ लग रही है।
जिला अस्पताल में केवल दो इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर तैनात हैं। चार पद खाली पड़े हैं। अक्सर, आंख, बच्चों या अस्थि रोग के डॉक्टर की ड्यूटी ट्रॉमा की इमरजेंसी में लगती है। कहने को ऑन कॉल सर्जन व अन्य डॉक्टर तैनात रहते हैं मगर अधिकतर घायलों को सर्जन नहीं मिलते। ओपीडी के समय दिन में 11 बजे तक खून आदि की जांच होती है। ट्रॉमा में भर्ती मरीजों को भी जांच के लिए अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है या फिर बाहर से ही जांच करानी पड़ती है। अभी भी ट्रॉमा से मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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हृदय रोग की ओपीडी साढ़े पांच माह से बंद
जिला अस्पताल में हृदय रोग की ओपीडी पिछले साढ़े पांच माह से बंद चल रही है। यहां तैनात रहे हृदय रोग के चिकित्सक डॉ. संजीव वर्मा दिसंबर 2021 में ही रिटायर हो गए थे। तब से दूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। एक महीने पहले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के औचक निरीक्षण में भी लोगों ने यह समस्या बताई थी मगर तैनाती नहीं हो सकी है। इससे हृदय रोगी परेशान हैं।
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ईएमओ के चार पद खाली पड़े हैं। इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा चुका है। हृदय रोग की ओपीडी को संचालित करने के लिए भी चिकित्सक की मांग की गई है।
-डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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