यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में एक बार फिर बाराबंकी जिले का ही डंका बजा है। यूपी मेरिट में पहले तीन स्थान पर यहां की चार छात्राओं ने कब्जा जमाकर जिले का नाम रोशन किया है। महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज की साक्षी वर्मा ने 491 अंक पाकर पहला स्थान, सोनाली वर्मा व प्रतिमा सिंह ने 490 अंक पाकर दूसरे स्थान पर है।
तीसरे स्थान पर इसी स्कूल की प्रेरणा वर्मा ने 489 अंक पाकर तीसरे स्थान पर हैं। बाराबंकी के मेधावी यहीं नहीं ठहरे हैं उत्तर प्रदेश के टापटेन की सूची में सांई इंटर कॉलेज के आयुषी सिंह ने पांचवां व आयुषी चौधरी ने छठे स्थान पर कब्जा जमाया है।
यूपी बोर्ड में कायम है जिले का रसूख
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम रविवार को घोषित कर दिया। इंटरमीडिएट में प्रदेश की श्रेष्ठता सूची टॉप टेन में जिला के छह मेधावियों ने स्थान बनाकर जिले का रसूख प्रदेश में कायम रखा है। बीते करीब दस वर्षो से बाराबंकी के मेधावियाें ने जिले का नाम रोशन किया है। कई वर्षो से फलक पर बाराबंकी के सितारे चमकते रहे हैं।
बुलंद इरादों व आत्मविश्वास से मिली सफलता
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में पांचवां स्थान पाने वाली आयुषी सिंह ने 97.4 फीसद अंक पाकर जिले का नाम रोशन किया है। भ्रष्टाचार व बेरोजगारी को देश की गंभीर समस्या मानने वाली आयुषी सिंह प्रशासनिक सेवा में जाकर देश के विकास में योगदान देना चाहती हैं। वे सफलता का श्रेय माता पिता व गुरुजनों को देते हुए कहती हैं कि आत्मविश्वास से लक्ष्य को ध्यान मेें रखकर नियमित पढ़ाई से सफलता जरूर मिलती है।
आयुषी की सफलता से पूरा परिवार उत्साहित है। आयुषी के पिता राकेश वर्मा किसान हैं जबकि मां विजय कुमारी शिक्षिका हैं। वह कहती हैं कि नियमित वे टाइम टेबल के हिसाब से विषय के टॉपिक को समझ कर स्कूल के अलावा 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती है। आयुषी को पढ़ना पसंद है।
समझ कर पढ़ाई करने से मिली सफलता
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में छठा स्थान पाने वाली आयुषी चौधरी भी आईएएस बन कर देश की सेवा करना चाहती हैं। आयुषी ने 97.2 फीसद अंक प्राप्त किया। आयुषी बताती है कि विषयों को समझ कर पढ़ने और कठिन परिश्रम से यह सफलता मिली है।
आयुषी के पिता अजय कुमार बिजनेसमैन हैं और माता चंद्रलता गृहणी हैं। भ्रष्टाचार व महंगाई को देश की गंभीर समस्या मानने वाली आयुषी कहती है कि बोर्ड परीक्षा में यह सफलता कड़ी मेहनत से मिली है। वह कॉलेज के अलावा पांच घंटे ही घर में पढ़ती थी लेकिन पूरी लगन से। पढ़ाई के दौरान पूरा ध्यान टॉपिक को समझने पर लगाती है।