देवा (बाराबंकी)। एक दिन बाद शुरू होने वाले विख्यात देवा मेला में इस बार भी अकीदतमंदों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। कस्बे में स्थित गेस्ट हाउसों में बुकिंग हो पूरी चुकी है। विभिन्न प्रांतों से आने वाले अकीदतमंद इन्हीं गेस्ट हाउसों में रुक कर सूफी संत की जियारत करेंगे।
ऐसे में कोविड-19 गाइडलाइन का पालन कराना जिला प्रशासन व पुलिस से लेकर मजार ट्रस्ट के लिए चुनौती सरीखा साबित हो सकता है। मजार पर मेले के कार्यक्रमों को भव्य रूप देने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। वहीं जिला प्रशासन से अभी भी ट्रस्ट को गाइडलाइन का इंतजार है। 27 अक्तूबर तक देवा मेला परिसर में चहल-पहल रहेगी।
कौमी एकता व सौहार्द के प्रतीक महान सूफी संत हाजी वारिस अली के पिता सैयद कुर्बान अली शाह दादा मियां की याद में प्रतिवर्ष लगने वाला कार्तिक मेला 22 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। इस मेले में पूर्व की भांति कोलकाता, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, जम्मू कश्मीर व महाराष्ट्र आदि प्रांतों के अकीदतमंदों के जुटने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
वर्तमान में कस्बे में करीब चार दर्जन गेस्ट हाउस (पंजीकृत व अपंजीकृत) संचालित हैं। इनमें श्रद्धालुओं द्वारा फोन पर एडवांस बुकिंग कराई जा चुकी है। इस मेले में मजार परिसर में होने वाले धार्मिक व पारंपरिक कार्यक्रम भले ही सादगी से संपन्न कराए जाने का दावा ट्रस्ट कर रहा हो लेकिन हकीकत में कार्यक्रम स्थल से इतर मजार परिसर में इन कार्यक्रमों में शिरकत करने के लिए हजारों की भीड़ जुटेगी।
मजार के समा खाना में होने वाले कार्यक्रमों को भव्यता प्रदान करने के लिए ट्रस्ट के कर्मचारी जुटे हुए हैं। मजार शरीफ को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया है। परिसर की साफ-सफाई नियमित तौर पर कराई जा रही है।
हाजी वारिस अली शाह मसोलियम ट्रस्ट के मैनेजर शाद महमूद वारसी ने बताया कि देवा मेला के दौरान मजार शरीफ पर होने वाले कार्यक्रमों को बेहद सादगी से संपन्न कराया जाएगा। मजार ट्रस्ट निरंतर जिला प्रशासन के संपर्क में है। जिला प्रशासन से गाइडलाइन मिलने के बाद उसी के मुताबिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने व ठहरने की व्यवस्था को मूर्त रूप दिया जाएगा।
इस बार मेला ग्राउंड में न तो कोई दुकान लगेगी और न ही कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम ही आयोजित होगा। ऐसे में देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार भी मनोरंजन के अभाव में मायूस होना पड़ेगा।