बाराबंकी। जिला कारागार में नींबू घोटाले के मामले की जांच में साबित हुआ है कि जेल में तीन माह तक नींबू की खरीद हुई थी। यह नींबू खरीद केवल कागजों पर हुई थी या वाकई में, यह बड़ा सवाल है। मामले की जांच करने वाले डीआईजी जेल के अनुसार ठेकेदार द्वारा ही बाजार में नींबू के दाम कम हो जाने के कारण कारागार स्तर पर नींबू की आपूर्ति न लिए जाने से नाराज होकर इसकी शिकायत की गई। डीआईजी की जांच रिपोर्ट से अमर उजाला की खबर पर मुहर लग गई है।
19 मई को अमर उजाला ने ‘तीन माह में बंदियों को पिलाया गया 30 क्विंटल नींबू’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। डीजी जेल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी जेल संजीव कुमार त्रिपाठी को मामले की जांच सौंपी थी। दो दिन पहले कारागार मंत्री द्वारा जेल पहुंचकर जांच की गई और जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह समेत चार लोगों को सस्पेंड कर दिया गया। डीआईजी जेल ने बताया कि जनवरी से मार्च माह के बीच में बंदियों को एक-एक नींबू दिया गया था। उन्होंने बताया कि नींबू की खरीद ठेके की दर पर छह रुपये प्रति नींबू के हिसाब से हुई थी।
डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने बताया कि जांच के दौरान ऐसा पाया गया है कि संबंधित नींबू की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार द्वारा ही बाजार में नींबू के दाम कम हो जाने पर उससे नींबू की आपूर्ति न लिए जाने के कारण नाराज होकर शिकायत की गई। डीआईजी जेल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जेल में तैनात तीन डॉक्टरों द्वारा बंदियों को नींबू देने की सलाह दी गई थी। वर्ष 2020 व 2021 में भी कोरोना काल के समय जेल में नींबू की आपूर्ति हुई थी। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब जनवरी माह में नींबू का रेट कम था तब भी छह रुपये प्रति नींबू की दर से इसकी खरीद दिखाई गई। मंत्री ने अपनी जांच में भी ऐसा पाया और जेल अधीक्षक समेत चार लोगों को सस्पेंड किया गया।