बाराबंकी। थोक खरीदारों के लिए डीजल 25 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। इसका असर परिवहन निगम पर भी पड़ा है। ऐसी हालत में अब रोडवेज बसें निगम द्वारा अधिकृत पंप पर ईंधन लेने के बजाय बाहर से डीजल भराकर रोजाना का करीब डेढ़ लाख का घाटा बचा रही हैं। अधिकारियों का तर्क है कि पहले ही चार रुपये प्रति लीटर महंगा डीजल खरीदा जा रहा था, लेकिन अब 25 रुपये प्रति लीटर डीजल महंगा होने से अधिक नुकसान होने की आंशका है। इसलिए अनुबंधित बसों में अब बाहरी पेट्रोल पंप से डीजल भराया जा रहा है, ताकि घाटा कम हो।
बाराबंकी डिपो से मौजूदा समय में 115 अनुबंधित बसों का संचालन हो रहा है। अभी तक डिपो के पेट्रोल पंप पर ही बसों में डीजल भराया जाता था। डिपो के पेट्रोल पंप पर डीजल की सप्लाई भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) द्वारा की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बीते माह में भी जब निजी पेट्रोल पंपों पर डीजल का भाव 86.10 रुपये प्रति लीटर था तो भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा 91.10 रुपये प्रति लीटर की दर से आपूर्ति की जा रही थी। जो चार रुपये प्रति लीटर महंगा था।
लेकिन बीते सोमवार से डीजल का थोक रेट 25 लीटर प्रति लीटर और महंगा हो गया। अधिकारियों के अनुसार इतना महंगा डीजल भराने से प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान होगा। इसलिए घाटे से बचने के लिए अब बसें निजी पेट्रोल पंपों पर डीजल भरा रही हैं। अनुबंधित बसें जहां जिले के प्रमुख मार्गों पर दौड़ती ही हैं, साथ ही चार दर्जन से अधिक बसें लखनऊ के चक्कर भी लगाती हैं। इन 115 बसों में औसतन रोजाना छह हजार लीटर डीजल की खपत होती है।
एआरएम आरएस वर्मा ने बताया कि डीजल का थोक रेट अचानक प्रति लीटर 25 रुपये बढ़ने से डिपो का बजट गड़बड़ा जाएगा। रोजाना करीब डेढ़ लाख रुपये राजस्व हानि का अनुमान है। इसलिए राजस्व क्षति को बचाने के लिए बाहर के निजी पेट्रोल पंप से डीजल भराया जा रहा है।