बाराबंकी/ गनेशपुर। लखनऊ-बाराबंकी से गोंडा, बहराइच, बलरामपुर व श्रावस्ती जिलों को जोड़ने वाले सरयू नदी पर बने 38 साल पुराने संजय सेतु में एक बार फिर दरार आ गई। मंगलवार की रात खतरा बढ़ने की जानकारी पर हरकत में आया विभाग मरम्मत कार्य में जुट गया है।
किंतु हजारों वाहनों के नदी पार करने का एक मात्र जरिया इस पुल पर एक-एक तरफ से रोककर वाहनों को छोड़ा जा रहा था। इससे बुधवार को पूरे दिन लोगों को जाम से जूझना पड़ा। इस दौरान चाहे यात्री बसें हो या एंबुलेंस उन्हें भी जाम में फंसकर घंटों इंतजार करना पड़ा। दोनों तरफ पुलिस मौजूद तो थी पर भीषण गर्मी के कारण स्थिति संभालने में काफी पसीना छूट रहा था। मरम्मत का काम एक मई तक चलेगा।
रामनगर क्षेत्र में बाराबंकी-गोंडा-बहराइच हाईवे पर सरयू नदी के ऊपर संजय सेतु बना है। सप्ताह भर पहले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा की जाने वाली रुटीन चेकिंग में संजय सेतु के जोड़ों में दरार पाई गई थी। लगातार वाहन चलने से यह दरार बढ़ती ही जा रही थी।
इसलिए एनएचएआई ने बहराइच, गोंडा व बाराबंकी के जिलाधिकारियों की अनुमति लेकर सोमवार से पुल की मरम्मत शुरू करवा दी थी। मंगलवार की रात से गोंडा की ओर से एक लेन पर यातायात बंद कर दिया गया। वन-वे होने के बाद पुल के आसपास जाम लगना शुरू हो गया था। मंगलवार की शाम के बाद हालात कठिन हो गए।
तमाम रोडवेज बसें या एंबुलेंस तक जाम में फंसी रही। रात में जाम से लोग कराह उठे। हजारों यात्री बसों से उतर कर जाम समाप्त होने का इंतजार करते रहे। लेकिन बुधवार की भोर से ही जाम लगा था जो दोपहर तक लगा रहा। जाम के कारण लोग अपने गंतव्य पर दो से तीन घंटे लेट पहुंच रहे हैं।
इसे देखते हुए यहां पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं ताकि यातायात बहाल रहे। एनएचएआई के रेजिडेंट इंजीनियर प्रमोद यादव ने बताया कि मरम्मत का कार्य लगभग 15 दिन चलेगा। एक सप्ताह बाद दूसरी लेन बंद की जाएगी। एक मई को मरम्मत का काम पूरा होने की उम्मीद है।
38 साल पहले 50 करोड़ से बना था संजय सेतु
बाराबंकी-गोंडा-बहराइच हाईवे पर संजय सेेतु का शिलान्यास 1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किया था। करीब 900 मीटर लंबे संजय सेतु को बनाने में तब 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। शिलान्यास के चार साल बाद 1984 में संजय सेतु पर यातायात शुरू कर दिया गया था। संजय सेतु प्रदेश की राजधानी लखनऊ को बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती व नेपाल देश से जोड़ता है।
पांच साल में छह बार हुई मरम्मत
संजय सेतु की मरम्मत होने का यह कोई पहला मौका नहीं है। वर्ष 2017 में इस पुल का पिलर धंसने पर मरम्मत हुई थी। उसके अगले ही साल 2018 में फिर सेतु का पिलर करीब चार इंच धंस गया था। फरवरी 2021 में संजय सेतु के आठ जोड़ों में दरार आने पर मरम्मत की गई थी।
जाम के हालात पैदा हुए थे। इसके बाद जुलाई 2021 में भी ज्वाइंटरों में दरार आने पर मरम्मत की गई थी। इस साल जनवरी में भी इस सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आई थी। अभी दो महीना पूरा ही हुआ है कि फिर मरम्मत होने लगी है।