बाराबंकी के जिला अस्पताल इमरजेंसी में कुछ इस तरह डायरिया पीड़ित बच्ची को बिना स्ट्रेचर के भर्ती ?
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बाराबंकी। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में गंभीर हालत में पहुंचने वालों को स्ट्रेचर तक नहीं मिलते हैं। अक्सर तीमारदार मरीज को अपने कंधे पर लादकर अस्पताल के अंदर तक पहुंचते हैं। शुक्रवार को भी डायरिया पीड़ित बच्ची की पिता उसे गोद में लेकर किसी तरह से अंदर पहुंचा। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रोजाना करीब 300 मरीज आते हैं। इनमें तमाम मरीज ऐसे होते हैं जो सीएचसी से रेफर होकर आते हैं।
हादसों में घायल लोगों को भी पुलिस जिला अस्पताल भेजती है। लेकिन यहां एंबुलेंस से पहुंचने के बाद अस्पताल के अंदर तक पहुंचने के लिए कोई स्ट्रेचर देने नहीं आता। शुक्रवार को हैदरगढ़ क्षेत्र के देवगढ़पुर की काजल (10) को लेकर उसका पिता पहुंचा तो ग्लूकोज की बोतल लगी थी। एंबुलेंस से उतरने के बाद उसे गोद में ही बच्चे को लेेकर काफी देर तक भटकना पड़ा। काजल डायरिया पीड़ित थी और उसे सीएचसी से रेफर किया गया था। (संवाद)