बाराबंकी। किसानों को अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रीकरण योजना में एक बार फिर सेंधमारी से तथाकथित ‘पारदर्शी व्यवस्था’ पर सवाल उठ रहे है। लंबे इंतजार के बाद किसानों को एक बार फिर झटका लगने से वह मायूस हैं। किसानों की आय दोगुनी करने की कड़ी बनी यंत्रीकरण योजना के मास्टर माइंड सरकार के मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं।
कुछ ऐसा ही हाल मंगलवार से शुरू हुई कृषि यंत्रीकरण योजना की बुकिंग में सामने आया। किसान ऑनलाइन बुकिंग को लेकर साइट खोलते रहे, मगर, साइट खुली नहीं। दो घंटे बाद जब साइट खुली तो पता चला की करोड़ों के कृषि यंत्रों की बुकिंग का लक्ष्य पूरा हो गया।
कृषि विभाग में पंजीकृत किसानों को 40 से 50 प्रतिशत अनुदान वाले कृषि यंत्रों की बुकिंग मंगलवार को तीन बजे से होने थी। किसान अपनी जरूरत के कृषि यंत्रों की बुकिंग कराने की तैयारी में थे। मगर, काफी प्रयास के बाद कृषि यंत्रों की बुकिंग की साइट तीन बजे से पांच बजे तक नहीं खुली।
इस पर किसानों ने उप कृषि निदेशक को फोन पर सूचना दी कि साइट ओपेन नहीं हुई और करोड़ों के कृषि यंत्र की बुकिंग हो गई। उन्होंने इसकी सूचना शासन में बैठे अधिकारियों को दी, क्योंकि यह कोई पहली बार नहीं हुआ। चार साल पहले से कृषि यंत्रीकरण योजना में पारदर्शिता को लेकर जब से ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की गई, तब से यह दिक्कत सामने आ रही है।
यंत्रीकरण योजना के मास्टर माइंड जब-जब योजना आई, तकनीकि खामियों की आड़ में इस योजना में सेंधमारी करने मेें कामयाब रहे। जरूरतमंद किसान ऑनलाइन बुकिंग साइट ओपेन न होने से बुकिंग ही कर नहीं पाते। वहीं मास्टरमाइंड इस अवधि में कृषि यंत्रों की बुकिंग का लक्ष्य साफ कर किसानों का हक मार रहे है। खुद को ठगा महसूूूस करने वाले किसानों का विश्वास इस योजना और व्यवस्था से उठ रहा है।
यंत्रीकरण बुकिंग से पहले अन्य सभी साइट हुई बंद
कृषि यंत्रीकरण योजना की बुकिंग से पहले ही साइट बंद होने से किसानों को काफी दिक्कत हुई। किसानों के पास पंजीकरण नंबर नहीं था। ऐसे में वह बिना पंजीकरण नंबर के बुकिंग न कर पाने के लिए परेशान रहे। वहीं साइट बंद होने से प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का काम भी मंगलवार को बंद रहा। अधिकारियों ने प्रदेश मुख्यालय से बात की तो उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रीकरण की बुकिंग को लेकर यह दिक्कत आ रही है।
कृषि यंत्रीकरण योजना की बुकिंग की पारदर्शिता को लेकर ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था शुरू की गई थी। मगर यहां किसान साइट ओपेन न होने की शिकायत करते रहे और पता चला कि कृषि यंत्रों की बुकिंग का लक्ष्य पूरा हो गया। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
अनिल कुमार सागर, उप कृषि निदेशक