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साल भर में जिले में ट्रेन हादसों में गई 155 लोगों की जान

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बाराबंकी। जिस तरह से जिले में होने वाले ट्रेन हादसों में लोगों की जान जा रही है उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाराबंकी में प्रवेश होते ही ट्रेन हिचकोले मारकर चलने लगती है। इसी का नतीजा है कि यहां पर आए दिन किसी न किसी व्यक्ति की मौत ट्रेन हादसे के चलते हो जाती है। भले ही वह हादसा की जगह हत्या का मामला हो लेकिन पुलिस उसे सिर्फ हादसा बताकर मामला रफा दफा कर देती है। बीते एक साल पर नजर डालें तो करीब 155 लोगों की मौत रेल हादसों में गई है। इनके शव रेलवे ट्रैक के आस पास पाए गए हैं।
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प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी में रेलवे ट्रैक किनारे काफी संख्या में शव मिलते हैं। करीब दो साल पहले शहर में रेल लाइन किनारे एक युवती का शव मिला था जिसकी हत्या करने की पुष्टि भी हुई। लेकिन इसकी पहचान आज तक नहीं हो सकी है। इसी तरह अयोध्या रेल मार्ग पर जहांगीराबाद के पास बीते दिनों एक युवक का नग्न हालत में क्षत विक्षत शव मिला। ऐसा लग रहा था कि इसकी हत्या की गई हो लेकिन पुलिस ने इसे हादसा बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। हैदरगढ़ इलाके में सुल्तानपुर रेलमार्ग पर भी हत्या कर फेंके गए युवक का शव बरामद हो चुका है। जिस तरह से यहां रेल लाइन किनारे शव मिलते हैं उससे यही लगता है कि अपराध प्री प्लान बनाकर हत्या करने के बाद रेल लाइन को सिर्फ शवों को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। (संवाद)
जिले से निकली है यह रेल लाइन
जिले में लखनऊ से सफेदाबाद होते हुए एक रेल लाइन जहां अयोध्या की तरफ गई है वहीं दूसरी रेल लाइन गोरखपुर की तरफ निकल गई है। इसी तरह सुल्तानपुर रेल मार्ग हैदरगढ़ होते हुए निकला है। जबकि बुढ़वल से फतेहपुर होते हुए सीतापुर रेलमार्ग गया है। ऐसे में इन सभी रेल मार्ग पर किसी न किसी दिन कोई शव मिलने की सूचना पुलिस को मिलती है। लेकिन इन मामलों को पुलिस भी हल्के में लेकर सिर्फ पोस्टमार्टम करवाकर खानापूर्ति करने का काम करती है।
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इन जगहों पर मिलते सबसे ज्यादा शव
जिले में जहां पर सबसे ज्यादा शव रेल मार्ग किनारे मिलते है उनमें सफेदाबाद से लेकर बाराबंकी रेलवे स्टेशन के बीच, रसौली से जहांगीराबाद के बीच, सैदखानपुर, सफदरगंज, मसौली, बिंदौरा, रामनगर, त्रिवेदीगंज, चौबीसी, हैदरगढ़ आदि ऐसे प्वाइंट है जहां पर सबसे ज्यादा शव रेल लाइन किनारे बरामद होते है। इसके पीछे एक यह भी कारण है कि इन स्थानों के आस पास हाईवे भी है। ऐसे में हाईवे पर होने वाले अपराध के बाद भी आरोपी आसानी से रेल मार्ग पर शवों को ठिकाने लगाने का काम करते है।
रेल मार्ग किनारे जो भी शव बरामद होते है उनका पोस्टमार्टम करवाने के साथ ही नियमानुसार कार्रवाई होती है। ज्यादातर मृतकों की पहचान भी हो जाती है। रेलवे पुलिस व जीआरपी कर्मी सुरक्षा के लिए हर समय मुस्तैद रहते है। -वीरेंद्र प्रताप यादव, प्रभारी निरीक्षक जीआरपी
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