ओला-बारिश से फसल में मची सड़ांध से झुब्ध होकर किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उस पर इलाहाबाद बैंक का 97,000 रुपये का कर्ज था। यह भी पता चला है कि खाते में जमा 4,000 रुपये बैंक ने गुपचुप ढंग से केसीसी कर्ज में समायोजित कर लिये थे।
मामला बबेरू तहसील के भांटी गांव का है। यहां किसान नरेंद्र सिंह (40) ने बृहस्पतिवार की रात घर में खपरैल पर रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। सुबह यह देख पत्नी और तीन मासूम बच्चों में कोहराम मच गया। खबर पाकर मृतक के चाचा राजेश सिंह भी आ गए। उन्होंने कोतवाली पुलिस को सूचना दी।
राजेश सिंह ने बताया कि रात करीब आठ बजे नरेंद्र ने बताया था कि वह खेत पर गया था। मसूर की फली में सड़ांध थी। नरेंद्र की 20 बीघा जमीन में मसूर, चना, गेहूं, सरसों, अलसी सब चौपट हो गई।
चाचा ने यह भी बताया कि नरेंद्र ने इलाहाबाद बैंक की बबेरू शाखा से वर्ष 2010 में किसान क्रेडिट कार्ड से 97,000 रुपये कर्ज लिया था। बताया कि नरेंद्र के खाते में सिर्फ 4000 रुपये जमा थे। बैंक ने बिना उसे बताए यह पैसा कर्ज के खाते में जमा कर दिया। फसल की बर्बादी और कर्ज से परेशान होकर उसने आत्महत्या कर ली।
शुक्रवार को सुबह उप जिलाधिकारी विनय पाठक और क्षेत्राधिकारी यशवीर सिंह ने भांटी गांव जाकर मृतक के आश्रितों को सांत्वना दी। उधर, बैंक मैनेजर शैलेंद्र कुमार सक्सेना का कहना है कि नियम के अनुसार ही खाते से उसका पैसा केसीसी कर्ज में डाला गया है। भांटी गांव में लगभग सभी किसानों की 70 फीसदी फसल खराब हो गई है।
उधर, भाजपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य अजय सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष भी यहां फसलों को नुकसान पहुंचा था। लेकिन सरकार ने मुआवजा नहीं दिया। उन्होंने सर्वे करा पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की है।