‘चीं-चीं’ करने वाली गौरैया के ब्याह में कई गांव उमड़ पड़े। बाजे-गाजे और नाचते घोड़ों ने बारात में धूमधाम मेें चार चांद लगा दिए। मंडप तले बड़ी तादाद में महिलाएं शादी के गीत गाती रहीं।
घास से बनी मंडप की मुंडेर में वर (चिड़वा) और कन्या (गौरैया) को दूल्हा और दुल्हन के रूप में सजाकर बैठाया गया। यह मौका था ‘विश्व गौरैया दिवस’ पर नरैनी क्षेत्र के मोहनपुर गांव में चिड़वा-चिड़िया की शादी का।
पक्षियों के पैरोकारों द्वारा आयोजित इस अनूठे ब्याह में जीव-जंतु विशेषज्ञ और वन विभाग के अधिकारी भी शरीक हुए। पूरी विधि विधान से प्राथमिक स्कूल भवन से नर गौरैया को दूल्हा बनाकर बारात निकाली गई। बारात में 11 सजे धजे घोड़े नाचते रहे। बड़ी तादाद में महिला-पुरुष बाराती थे।
अध्यापक यशवंत पटेल और उनकी पत्नी सुमन लता पटेल ने कन्या के रूप मेें गौरैया को दुल्हन बना रखा था। इस पटेल दंपति के घर में बारात की अगवानी हुई। यहां गाड़े गए मंडप के नीचे शादी की रस्मे अदा की गई। नर-मादा गौरैया को सात फेरे दिलाए गए। बाद में दूल्हा (नर) के साथ दुल्हन (मादा) को विदा कर दिया गया।
दोनों एक साथ पेंग मारते हुए जंगल की ओर उड़ गए। इस अवसर पर क्षेत्रीय वनाधिकरी केके जायसवाल, वन दरोगा नफीस खान, वन्य जीव कार्यकर्ता महर्षि कुमार तिवारी, एप्सा हर्बल उत्पाद, इलाहाबाद के कंसलटेंट मंजीत, बक्सर (बिहार) से आए लेखचंद्र त्रिपाठी, दिल्ली से आए राहुल गुप्ता, प्रवास सोसायटी के आशीष सागर, राघवेंद्र मिश्रा, दिनेश पाल सिंह, जगदीश निषाद शामिल रहे।