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- फोटो : BANDA
बांदा/बबेरू/अतर्रा/खत्रीपहाड़। नवरात्र की अष्टमी पर देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर मां की पूजा-अर्चना की। इस दौरान देवी के महागौरी स्वरूप को पूजा और अठवाईं चढ़ाईं। साथ ही मन की मुरादें मांगी। जिनकी मुराद पूरी हुई उन्होेंने कठिन तपस्या के बाद मंदिर पहुंचकर देवी के दर्शन किए।
महामारी संक्रमण का असर पर भी भक्तों पर साफ नजर आया। मंदिरों में उन्हें एक साथ प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। महेश्वरी देवी, काली देवी, सिंहवाहिनी, चौसठ जोगिनी, मरही माता, कालका देवी, महामाई मंदिर में सुबह से महिलाओं का तांता लगा रहा। महिलाओं के हाथों में पूजा के थाल थे। जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक की अनुमति न होने से प्रतिमाओं में पुष्प अर्पित करके श्रद्धा जताई। बबेरू में मढ़ीदाई मंदिर, शिव मंदिर, बाकल देवी आदि मंदिरों में सुबह से पूजन-अर्चन करने वालों की भीड़ रही। महिलाओं ने अठवाई चढ़ाई। कन्या भोज के आयोजन हुए। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने सांग व घंटा चढ़ाए। तमाम श्रद्धालु सिर पर जवारे लेकर जत्थे के साथ मंदिरों में उपस्थित हुए।
अतर्रा में शीतला माता, बड़ी माता, छोटी माता, गौरा बाबा धाम, भद्रकाली में महिलाओं की खासी भीड़ रही। यहां अधिकांश श्रद्धालुओं ने बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा अर्चना की। पहाड़िया दाई मंदिर में पीने के पानी की व्यवस्था न होने से श्रद्धालु परेशान रहे। पुजारी राजकरण ने बताया कि हैंडपंप खराब पड़ा है। जलस्तर नीचे चले जाने से कुएं से भी कीचड़युक्त पानी निकल रहा है। उधर, खत्री पहाड़ विंध्यवासिनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर, सतना आदि जिलों से भी हजारों श्रद्धालु देवी दर्शन को आए। मान्यता है कि अष्ठमी को विंध्यवासिनी देवी पहाड़ के ऊपर स्थित मंदिर में विराजमान रहती हैं, इसलिए श्रद्धालुओं ने चिलचिलाती धूप में पहाड़ के ऊपर पहुंचे और पूजन-अर्चन किया। बच्चों का मुंडन संस्कार भी हुआ।