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मनमानी चुनाव ड्यूटियों पर भड़का शिक्षक संघ

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election,school,teacher,BSA,DM - फोटो : BANDA
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बांदा। पंचायत चुनाव में गर्भवती शिक्षिकाओं, प्रसूताओं, दिव्यांगों और गंभीर रोगी अध्यापकों की ड्यूटी लगाने और अनुरोध के बाद भी ड्यूटी न काटे जाने से उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से आमने-सामने इस मुद्दे पर वार्ता की और सात सूत्री ज्ञापन दिया। जिलाधिकारी ने शिक्षक नेताओं को सहानुभूति पूर्वक विचार करने का भरोसा दिलाया है।
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सोमवार को देर शाम प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी के नेतृत्व में विकास भवन में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम आनंद कुमार सिंह से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। कहा कि पंचायत चुनाव में मातृत्व अवकाश, गर्भवती शिक्षिकाओं, दिव्यांग, प्रसूताओं, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक-शिक्षिकाओं की ड्यूटी लगा दी गई है। कई पति-पत्नी दोनों की ड्यूटी लगाई गई है। अध्यापकों द्वारा इसकी अर्जी देने के बाद भी ड्यूटी नहीं काटी गई, जबकि यह शिक्षक ड्यूटी नहीं कर सकते। संघ ने यह भी कहा कि महिला मतदान कर्मियों को मतदान की पूर्व रात्रि में मतदान केंद्र में ठहरने को कहा गया है। इससे उनमें भय व्याप्त है। पूर्व संध्या पर रात को ठहरना अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। जो पुरुष शिक्षक संक्रमित या गंभीर बीमार हैं, उनकी अर्जियों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए।
ड्यूटी वाले अध्यापकों को मतदान के बाद कम से कम पांच दिन का अवकाश मिलना चाहिए, ताकि वह अपने स्वास्थ्य की देखभाल कर सकें। डीएम ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि महिला कर्मचारी को पूर्व संध्या पर पोलिंग बूथ पर रुकना अनिवार्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ड्यूटी संबंधी अर्जियों पर तत्काल निराकरण करें। शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष सहित संयुक्त मंत्री जय किशोर दीक्षित, उपाध्यक्ष अंजना अवस्थी, डॉ. नंदिता चौहान, संगठन मंत्री सुनीता प्रजापति, बड़ोखर ब्लॉक अध्यक्ष भुवनेंद्र यादव सहित राजेश द्विवेदी, शिवबदन यादव, राजेंद्र आर्य आदि मौजूद थे।
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जूनियर को मिली सीनियर की जिम्मेदारी
बांदा। शिक्षक संघ ने कहा कि अनुभवहीन नए शिक्षकों को पीठासीन और अनुभवी शिक्षकों को प्रथम व द्वितीय मतदान अधिकारी बनाया गया है। यह निर्वाचन आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है। कनिष्ठता और वरिष्ठता की समस्या आ सकती है। कहा कि पुरुष शिक्षक उपलब्ध हो तो महिलाओं के स्थान पर उन्हीं से कार्य लिया जाना बेहतर होगा। बहुत से शिक्षक स्कूल आने जाने में संक्रमित हो सकते हैं। उन्हें स्कूल बुलाना जरूरी हो तो रोस्टर के मुताबिक बुलाया जाए। (ब्यूरो)
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