बांदा। 18वीं बार विधानसभा के लिए अपना प्रतिनिधि चुनने जा रहे बबेरू विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं को मलाल है कि देश की आजादी के 75 साल बाद भी उन्हें अपने यहां रेल यात्रा का सुख नसीब नहीं हो पाया है।
आज भी बबेरू क्षेत्र के साढ़े तीन लाख से ज्यादा मतदाता और लगभग पांच लाख आबादी पीपे के पुल से यमुना नदी पार कर कानपुर, लखनऊ और फतेहपुर जनपदों के लिए सफर कर रही है। यमुना नदी पर दांदौ और औगासी घाट में बन रहे पुल एक दशक बाद भी अधूरे पड़े हैं।
बबेरू के मतदाताओं ने सभी प्रमुख दलों को मौका दिया। लेकिन यमुना के दोआबा क्षेत्र में आबाद यह इलाका आज भी बुनियादी समस्याओं और संकटों से जूझ रहा है। मौजूदा विधानसभा चुनाव में यहां की जटिल समस्याएं प्रमुख मुद्दे के रूप में नजर नहीं आ रहीं। पुरानी परंपरा और रस्म के मुताबिक सभी दल के प्रत्याशी जातिगत वोटों की गोटें बिठाने में जुटे हुए हैं।
बबेरू क्षेत्र में मतदाता: कुल मतदाता : 3,36,848, पुरुष मतदाता : 1,85,931, महिला मतदाता : 1,50,902, मतदान केंद्र : 221व मतदेय स्थल : 386
2017 में प्रमुख चार दलों को मिले वोट
बबेरू विधान सभा क्षेत्र में अब तक 17 बार हो चुके चुनाव में सबसे ज्यादा पांच बार कांग्रेस के विधायक चुने गए। सीपीआई और बसपा को 3-3 बार और सपा व भाजपा तथा निर्दलियों को 2-2 बार जीतने का मौका मिला। यहां सबसे ज्यादा 4 बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के देव कुमार यादव विधायक चुने गए। बसपा के जीसी दिनकर को तीन बार यहां के मतदाताओं ने जिताया। कांग्रेस के रामसनेही भारतीय और सपा के विशंभर सिंह यादव 2-2 विधायक हुए।
मौजूदा प्रत्याशी
- अजय पटेल (भाजपा), विशंभर सिंह यादव (सपा), रामसेवक शुक्ला (बसपा) व गजेंद्र पटेल (कांग्रेस)
विशंभर यादव। - फोटो : BANDA
अजय पटेल। - फोटो : BANDA
रामसेवक शुक्ला। - फोटो : BANDA
गजेंद्र पटेल। - फोटो : BANDA