बांदा। तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से ग्रामीण की मौत हो गई। दूध लेकर पैदल घर जाते समय हादसा हुआ। पुलिस ने बाइक कब्जे में ले ली। उधर, परिजनों ने मेडिकल कालेज के डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। रोष जताया कि दिनभर आईसीयू में रखा और फिर जब हालत बिगड़ गई तब रेफर किया।
मूलरूप से पनगरा (नरैनी) गांव निवासी पप्पू उर्फ अनिरुद्ध विश्वकर्मा (50) झील का पुरवा में किराए पर मकान लेकर सपरिवार रहता था। शुक्रवार को सुबह दूध लेकर पैदल घर जा रहा था। पुलिस लाइन तिराहा के पास सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी। सिर में चोट आने पर पप्पू गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद युवक बाइक छोड़कर भाग गए।
राहगीरों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां से उसे मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। हालत बिगडने पर डाक्टरों ने उसे कानपुर के लिए रेफर कर दिया। परिजन उसे ले जा रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
मृतक के भांजे सूरज विश्वकर्मा ने बताया कि मृतक भुसावल (महाराष्ट्र) में मजदूरी करता था। वह 15 दिन पहले घर आया था और तबसे यहीं था। वह अपने पीछे पत्नी और तीन पुत्रियां व एक पुत्र छोड़ गया है। आरोप लगाया कि मेडिकल कालेज में डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने तवज्जो नहीं दी। उसे आईसीयू में डाले रखा। जब हालत बिगड़ गई तो यह कहकर रेफर कर दिया कि मस्तिष्क का डाक्टर नहीं है। चाहों तो मरीज ले जाओ या भर्ती रखो। समय पर इलाज मिल जाता तो शायद पप्पू की जान बच जाती।