अलीशा ने भारत सरकार से निवेदन किया है कि उसे और उसके साथ फंसे भारतीयों को यूक्रेन से निकालकर अपने वतन पहुंचाने में मदद करे। उधर, यहां अलीशा के घर में पिता रफीक मंसूरी और परिवार के सभी लोग उसकी खैर-खैरियत और सलामती के लिए दुआएं कर रहे हैं।
बांदा निवासी एमबीबीएस छात्र भी यूक्रेन में फंसा
उधर, बांदा जनपद का एक और होनहार युवा यूक्रेन के युद्ध में फंस गया है। बिसंडा कस्बा के किराना व्यवसायी नरेश चंद्र गुप्ता का बेटा नीरज गुप्ता यूक्रेन के यीवानों फ्राकिवस्क शहर में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है। उसने जुलाई 2018 में वहां दाखिला लिया था। उसका यह आखिरी साल है। पिछले साल जून में घर आकर अगस्त में वापस गया था।
औरैया के विधूना निवासी छात्र भी यूक्रेन में
अब युद्ध छिड़ने के बाद घर के लोग फेसबुक और वीडियो कॉलिंग से लगातार उसकी पल-पल खबर ले रहे हैं। लेकिन नेटवर्क अक्सर आड़े आ रहा है। मां सुनीता ने बताया कि 28 फरवरी को नीरज को यहां घर आना था। फ्लाइट का टिकट बुक कर लिया था। लेकिन फ्लाइट रद्द हो जाने से वह वहां फंसा हुआ है। नीरज के माता-पिता और पूरा परिवार रात-दिन पूजापाठ करके बेटे की सलामती की प्रार्थनाएं कर रहे हैं। रिश्तेदार और पड़ोसी भी उसकी कुशलक्षेम पूछने घर आ रहे हैं। नीरज के साथ विधूना (औरैया) निवासी एमबीबीएस छात्र शिव प्रताप सिंह चौहान भी वहां फंसा हुआ है।