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तेरहीमाफी गोशाला में तीन मवेशियों की मौत

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तेरहीमाफी की गोशाला में पड़ीं मृतक गायें। - फोटो : BANDA
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तिंदवारी/बांदा। ठंड में ठिठुर कर और बारिश में भीगकर गोशालाओं में दम तोड़ते रहे मवेशी अब गर्मी में भूख और प्यास से मौत के मुंह समा रहे हैं। गोशालाओं के कर्ताधर्ता बजट का अभाव बता रहे हैं। ताजी घटना में तेरहीमाफी गांव की गोशाला में बीते 24 घंटे के अंदर तीन मवेशियों की मौत हो गई। बगैर पोस्टमार्टम कराए आनन-फानन उनकों ठिकाने लगा दिया गया। इसके पहले भी कई मवेशी मरे हैं।
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तेरहीमाफी में ग्राम पंचायत द्वारा गोशाला संचालित की जा रही है। लेकिन व्यवस्थाएं बेहद खराब हैं। गांव के दोधन यादव, श्रीराम यादव, बदलू यादव आदि ने बताया कि गुरुवार को सुबह तीन मवेशियों की मौत की सूचना उन्होंने अधिकारियों को दी।
इस पर प्रधान और सचिव ने तत्काल शवों को ट्रैक्टर ट्राली में भरवाकर कहीं फिंकवा दिया। ग्रामीणों ने बताया कि इसके पहले भी मौतें हुई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दिसंबर माह में करीब एक सैकड़ा मवेशी गोशाला में बंद थे। अब 60-70 ही बचे हैं। यहां नाम मात्र को नपातुला मोटा भूसा दिया जाता है। यह नाकाफी है। मवेशी भूखे रहते हैं।
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उधर, ग्राम पंचायत सचिव विनोद कुमार का कहना है कि गोशाला के लिए पैसा नहीं मिल रहा। कैसे चलाएं? उधर, सदर तहसीलदार पुष्पक ने कहा कि जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। प्रधान जयकरन वर्मा का कहना है कि जो भी संभव है व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
जानवरों के चक्कर में फालतू परेशान न करें
तिंदवारी/बांदा। गोशालाओं में मुख्यमंत्री गायों को अपने हाथों भले ही गुड़-चना खिलाएं और अफसरों को इनकी पूरी सुविधा का ख्याल रखने के निर्देश दें, पर जिला प्रशासन के अफसर इससे बेपरवाह हैं। इसकी ताजगी बानगी उस समय सामने आई जब तेरहीमाफी गोशाला में तीन मवेशियों की मौत और अन्य अव्यवस्थाओं के बारे में अपर जिलाधिकारी उमाकांत त्रिपाठी को फोन पर जानकारी दी गई तो उन्होंने झुंझलाकर कहा कि एमएलसी के चुनाव हो रहे हैं, जानवरों के चक्कर में फालतू परेशान न करें।
सिंहपुर की गोशाला में सात गायों की मौत
बांदा। बिसंडा ब्लाक के सिंहपुर माफी गांव की गोशालाओं में भी भूख-प्यास से मवेशियों की मौत हो रही है। गांव के कई दर्जन ग्रामीणों ने गुरुवार को यहां मंडलायुक्त से मिलकर उन्हें सामूहिक हस्ताक्षरों से दिए शिकायती पत्र में बताया कि पिछले वर्ष जुलाई में गोशाला स्थापित हुई थी। 480 गायें थीं। अब केवल 180 बची हैं। शेष की मौत हो चुकी है या उन्हें खदेड़ दिया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि मवेशियों को सरसों का मोटा भूसा दिया जाता है। कोई इलाज नहीं होता। कहा कि दो दिन पूर्व 22 मार्च को 7 गायों की मौत हुई है। प्रधान ने रातोंरात ट्रैक्टर से हटवाकर उन्हें जमीन में दबवा दिया है। पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ। ग्रामीणों ने जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र देने वालों में रज्जन पाठक, संदीप मिश्रा, जगतराम, संजय कुमार, ब्रजेश कुमार, पंकज पांडेय, राजकिशोर रैकवार, राजा पाठक, सीताराम पांडेय, अरुण कांत, सूरजभान आदि शामिल रहे। मंडलायुक्त ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
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