अतर्रा में गडरा नाला के पास तेज हवा से सड़क में टूटी पेड़ की डाल।
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बांदा। जनपद में गुरुवार को सुबह तेज धूप रही। सुबह 11 बजे अचानक मौसम बदला और काले बादल छा गए। आंधी भी आई। करीब 10 मिनट हल्की बारिश हुई। इससे मौसम सुहावना हो गया और लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन यह रहित क्षणिक रही। दो बजे के बाद तेज धूप निकली और उमस से लोग पसीने से तरबतर हो गए। उधर, आधी और बारिश से बिजली व्यवस्था चरमरा गई। शहर में 11 बजे बिजली गई तो शाम चार घंटे बाद आई। ग्रामीण इलाकों में छह घंटे से ज्यादा बिजली नहीं रही।
गुरुवार सुबह 11 बजे के बाद कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। बारिश के बाद उमस भरी चिपचिपी गर्मी से लोग बिलबिला उठे। वहीं बिजली ने कोढ़ में खाज का काम किया। बारिश के दौरान गायब हुई बिजली ने कई मोहल्लों में शाम तक दर्शन नहीं दिए। लोगों के इनवर्टर बोल गए। गर्मी से राहत के लिए लोग हाथ को पंखा लेकर घरों से बाहर निकल पड़े और बिजली विभाग को रह-रहकर कोसते रहें।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गुरुवार को अधिकतम तापमान 40 व न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वर्षा होने के कारण मौसम में नमी 75 फीसदी रही। दिन में 40 किलोमीटर की गति से हवाएं चलीं। करीब 1.0 मिलीमीटर बारिश हुई। पिछले सप्ताह भर से तेज धूप व उमस के कारण लोग नींद भर सो नहीं पा रहे थे। गुरवार को बादल छाए और तेज हवाओं के साथ बारिश हुई तो लोगों को बड़ी राहत मिली। कुछ ही देर में तेज धूप निकलने से उमस भरी चिपचिपी गर्मी से लोग बिलबिला उठे। बिजली कटौती ने कोढ़ में खाज का काम किया। तिंदवारी, बबेरू, नरैनी, मटौंध आदि क्षेत्रों में भी तेज हवाओं व बारिश के बाद बिजली व्यवस्था पटरी से उतरी रही। छह घंटे से ज्यादा लोगों को चिपचिपी गर्मी में बिना बिजली के बिताना पड़ा।
तेज हवां में उड़े टिनशेड, डालियां भी टूटीं
अतर्रा। कस्बे में गुरुवार दोपहर आई तेज धूल भरी आंधी ने कई स्थानों पर भारी नुकसान पहुंचाया। आंधी के चलते कई कच्चे मकानों की टिन की छतें उड़ गईं, जो दूर जाकर गिरीं। वहीं कई स्थानों पर पेड़ों की बड़ी-बड़ी डालियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं, जिससे आवागमन बाधित हो गया और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज तूफान के कारण तारों को भी नुकसान पहुंचा। विद्युत विभाग के अनुसार कस्बे के कई हिस्सों में केबल तार टूटने से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई, जो लगभग पांच से छह घंटे बाद बहाल हो सकी। आंधी थमने के बाद बिजली विभाग के कर्मचारी तुरंत सक्रिय हो गए और जगह-जगह टूटे तारों को जोड़ने में जुट गए।