- फरियादी ही नहीं कर्मचारी, अधिकारी भी परेशान
- बांदा विकास भवन में लिफ्ट एक गंभीर समस्या
बांदा। आधुनिकता के इस दौर में भी बांदा का विकास भवन लिफ्ट जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। जिसके कारण न केवल आम जनता बल्कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी परेशान हैं। विकास भवन की तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए 90 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो बुजुर्गों, बीमारों और दिव्यांगों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है।
विकास भवन की तीसरी मंजिल पर पशुपालन, जिला कार्यक्रम, नेडा, सहकारिता और पंचायत चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विभाग स्थित हैं। इन विभागों में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आने वाले बुजुर्ग फरियादी सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते हांफ जाते हैं। मवई गांव के रहने वाले बुजुर्ग सीताराम ने बताया कि उन्हें खाद के संबंध में एआर कोआपरेटिव से मिलना था लेकिन घुटनों की कमजोरी के कारण उन्हें तीसरी मंजिल तक पहुंचने में काफी दिक्कत हुई। इसी तरह, 72 वर्षीय सधुवा ने पशुपालन विभाग में अपने काम के लिए सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थता जताते हुए बिना मिले घर लौटना पड़ा।
केवल फरियादी ही नहीं, बल्कि आंगनबाड़ियों और पंचायत चुनाव से जुड़े कर्मचारियों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है। आंगनबाड़ियों रन्नो, असफा और रामप्यारी ने बताया कि जिला कार्यक्रम विभाग में उन्हें माह में कई बार जाना पड़ता है, और बुजुर्ग आंगनबाड़ियों के लिए सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल होता है। पंचायत चुनाव से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि निर्वाचन संबंधी सामग्री को तीसरी मंजिल तक लाने में काफी परेशानी होती है, और मजदूर भी सीढ़ियों की संख्या सुनकर काम करने से कतराते हैं।
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विकास भवन में लिफ्ट के लिए जगह आरक्षित है। भवन निर्माण के समय लिफ्ट क्यों नहीं लगाई गई, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो लिफ्ट लगवाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
- अजय कुमार पांडेय, सीडीओ