बांदा। केन नदी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंचने के बाद आखिर थम गई। रात से पानी घटने लगा तो प्रशासन व ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सोमवार को शाम चार बजे तक केन का जल स्तर 102.30 मीटर रहा। वहीं यमुना अभी खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। इसका जल स्तर 96.46 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से महज तीन मीटर दूर है। उधर, केन का पानी अभी भी रपटों के ऊपर से बह रहा है। लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। सुरक्षा के लिए यहां न तो होमगार्ड व पुलिस के जवान हैं और न ही नावों का इंतजाम किया गया है। उधर, फसलें डूबने के बाद वह सड़ने की कगार पर पहुंच गई हैं। इससे किसान परेशान हैं।
मध्य प्रदेश में हो रही बारिश की वजह से बांधों से लगातार पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। इससे केन नदी उफनाने लगी। रविवार को शाम केन नदी का जल स्तर 105.20 मीटर तक पहुंच गया था। यह खतरे के निशान से लगभग डेढ़ मीटर ऊपर है। रविवार की रात करीब 12 बजे से केन में जल स्तर घटना शुरू हो गया। सुबह आठ बजे तक करीब एक मीटर पानी उतर गया। शाम को चार बजे तक केन नदी का जल स्तर घटकर 102.30 मीटर पर पहुंच गया। इससे बाढ़ से प्रभावित होने वाले सदर तहसील व पैलानी के करीब 40 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिली। हालांकि चंद्रावल नदी की बाढ़ से किसानों की करीब एक हजार हेक्टेयर जमीन की उर्द, मूंग, अरहर, तिल आदि की फसलें बर्बाद हो गईं। इसमें दूसरे दिन भी लबालब पानी भरा रहा। किसानों का कहना है कि वह बर्बाद हो गए हैं। फसल तो सड़ ही गई, अब दोबारा बोने का मौका भी नहीं मिलेगा। प्रशासन को प्रभावित किसानों को सर्वे कराकर मुआवजा दिलाना चाहिए। उधर, चिल्ला में यमुना नदी अभी भी बढ़ रही है। सोमवार को शाम चार बजे तक यहां का जल स्तर 96.46 मीटर पर पहुंच गया। यहां खतरे का निशान 100 मीटर में हैं। इस क्षेत्र में कमासिन के करीब दस व बबेरू के छह गांव यमुना से प्रभावित होते हैं। हालांकि अभी इन गांवों में पानी नहीं पहुंचा है। लेकिन किसानों में यमुना की बाढ़ को कर दहशत जरूर है।केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक अभी यमुना और बढ़ सकती है। केन नदी के सोमवार रात तक करीब दो मीटर और कम होने का अनुमान है। दोनों नदियों पर निगाह रखी जा रही है।
फसलों की तबाही से किसानों के चेहरे उतरे
जसपुरा। जसपुरा में हाल ही में हुई बारिश और चंद्रावल नदी की बाढ़ से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। खेतों में बोई गई तिल, मूंग, उर्द, ज्वार की फसल पानी में डूबकर सड़ गई। खेतों में भराव के चलते किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। किसान प्रमोद तिवारी और लक्ष्मी देवी ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच बीघा खेत में तिल बोई थी। खेतों में लबालब पानी भर गया, जिससे तिली की नाजुक पौध गलने लगी है,पूरी फसल बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि तिल की बोआई की अभी शुरुआत थी, ऐसे में यह नुकसान बड़ा झटका है। जलभराव की वजह से खेतों में अब दोबारा बोआई कर पाना भी कठिन हो रहा है। किसानों ने प्रशासन से मुआवजा दिलाने व जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
बारिश से दलदल में बदले कच्चे रास्ते, आवागमन बाधित
अतर्रा। राजनगर वार्ड की सड़कों की हालत बरसात के बाद बदतर हो गई है। कच्चे रास्तों में पानी भरने से दलदल जैसी स्थिति बनने से लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय अभय सिंह सहित अन्य ने बताया कि स्कूली बच्चों सहित अन्य को रोजाना कीचड़ और गंदगी भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे वह हादसे का शिकार बनते हैं। कहा कि कई बार नगर पालिका व प्रशासन को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक काेई ठोस कदम नहीं उठाए गए। वार्डवासियों ने पालिका प्रशासन से बदहाल सड़कों को दुरुस्त कराने की मांग की है। (संवाद)