The voices of revolt echoed by district panchayat members
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बांदा। कार्यकाल की वर्षगांठ पूरी होने से पहले ही जिला पंचायत में आधा दर्जन से ज्यादा सदस्यों ने बगावत के स्वर बुलंद कर दिए हैं। मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर जिला पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। निविदाओं को द्वेष पूर्ण बताते हुए निरस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार को जिला पंचायत सदस्यों का जत्था मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचा और सामूहिक हस्ताक्षरों से छह सूत्री ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य व पंचम वित्त जिला निधि में उपलब्ध बजट से कई गुना ज्यादा 4543.77 लाख की निविदाएं स्वीकृत की गई है। सदस्यों का आरोप है कि सभी 30 वार्डों को एक समान धनराशि आवंटित नहीं की गई। बांदा विधान सभा क्षेत्र में ज्यादा पैसा दिया गया। यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड की पूरी स्वीकृति के बगैर निविदाएं स्वीकृत की जा रही हैं। उपलब्ध बजट में 194 परियोजनाओं की निविदाएं इसी माह जनवरी में स्वीकृत करने की गुपचुप तैयारी है। इसमें भी 30 वार्डों को समान रूप से परियोजनाएं नहीं दी गई हैं।
सदस्यों ने 4 सितंबर को ही बैठक की कार्रवाई अब तक मिनट बुक में दर्ज न करने, अध्यक्ष व अपर मुख्य अधिकारी द्वारा पद का दुरुपयोग करने, अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने, चहेते ठेकेदारों को गोपनीय ढंग से निविदाएं स्वीकृत करने, पूल टेंडर कराने आदि के भी आरोप लगाकर आयुक्त से निविदाओं को निरस्त कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन देने वाले सदस्यों में रामनरेश सिंह (वार्ड-20), रजनी यादव (वार्ड-2), चंद्रशेखर (वार्ड-27), शिवकरन दिनकर (वार्ड-30), कमलेश साहू (वार्ड-28), मीरा देवी (वार्ड-21), सुजाता राजपूत (वार्ड-15) और राजरानी (वार्ड-18) शामिल रहे। गौरतलब है कि अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल भाजपा के हैं।
हर क्षेत्र में विकास कार्य, आरोप जायज नहीं
बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने सदस्यों के आरोपों को गलत बताया है। कहा कि जिला पंचायत का बजट व परियोजनाएं जिले के हर ब्लाक और क्षेत्र में दी गई हैं। किसी से कोई भेदभाव नहीं किया गया है। अन्य आरोप भी जायज नहीं है। अध्यक्ष ने कहा कि आरोप लगाने वाले सदस्यों का अपना नजरिया है।