भाईदूज पर भाई आर्यव को तिलक लगाती छोटी बहन अमायरा, साथ में छोटा भाई अभिमान। संवाद
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बांदा। दो दिनों तक रंगों से सराबोर होली जश्न के बाद रविवार को भाईदूज मनाई गई। भाई-बहनों के बीच पवित्र रिश्तों की बानगी घर-घर नजर आई। भाइयों को हर तरह के संकट से बचाने और उनकी लंबी उम्र के लिए बहनों ने व्रत रखा। तिलक कर भाइयों का मुंह मीठा किया और उनके हाथों खुद भी मिठाई खाई।
चैत्र मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाईदूज मनाया जाता है। इसके अलावा दीपावली में भी यह पर्व मनाने की परंपरा है। रविवार को सुबह से ही तैयारियां थीं। हालांकि इसका शुभ मुहूर्त शनिवार को दोपहर ही आ गया था। रविवार को सुबह 10 बजे के बाद तक रहा।
बड़ी संख्या में ससुराल से मायके आई बहनों ने भाइयों का तिलक किया। भाइयों ने भी उन्हें उपहार दिए। मासूम भाई-बहनों से लेकर उम्रदराज भाई-बहनों ने यह धार्मिक परंपरा निभाई। रोली, अक्षत, मिठाई, दीपक, सुपारी या सूखा गोला से सजी थाली से भाइयों की आरती उतारी। भाइयों ने पैर छूकर बहनों से आशीर्वाद लिया।