बांदा। घर में अकेले राजमिस्त्री ने तंगहाली के चलते बृहस्पतिवार की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से काम न मिलने पर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। रोज काम की तलाश में जाता और बैरंग लौट आता था। इससे वह कुछ दिनों से तनाव में था।
पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। कोतवाली नगर के मढिय़ा नाका निवासी बल्देव प्रसाद का बेटा कामता प्रजापति (55) ने बृहस्पतिवार की रात कमरे में चादर से सीलिंग हुक पर फांसी लगा ली। ऊंचाई ज्यादा होने पर उसने चारपाई में खड़े होकर गले में फंदा कसा था।
दरवाजे अंदर से बंद थे। शुक्रवार को सुबह कामता के बाहर न आने पर परिजनों ने खिड़की से देखा तो शव फंदे पर लटक रहा था। सूचना पर आई पुलिस की मौजूदगी में परिजनों ने खिड़की तोड़कर दरवाजे खोले और शव को फंदे से उतारा।
इस बाबत मृतक के भाई दीनदयाल ने बताया कि घटना के वक्त कामता घर पर अकेला था। पत्नी सुमित्री अपनी पुत्री रानू की ससुराल गई थी। बताया कि कामता पेशे से राजमिस्त्री था। लॉकडाउन के बाद से कोई काम नहीं मिलने से परेशान था।
कुछ दिनों से लगातार मंडी जाता और काम न मिलने पर घर लौट आता था। आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इसी तनाव में उसने आत्महत्या कर ली। भाई ने यह भी बताया कि कामता पहली मां की संतान था। चार भाइयों में दूसरे नंबर का था।