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मजदूर बिना खेतों की कटाई भी ‘लॉक डाउन’

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अतर्रा में डुग्गी पीटता नगर पालिका का मजदूर। - फोटो : BANDA
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अतर्रा। ‘भैया-बहनों गुहार सुनो। परदेस से आवन वालौ की तुरतैं सूचना देओ’। लॉकडाउन के पहले दिन बुधवार को नगर पालिका परिषद की ओर से नगर की गलियों की यही डुग्गी गूंजती रही। परिषद में राजकुमार बसोर से यह डुग्गी पिटवाई। इसमें कहा गया कि परदेस से आने वाले लोगों को घर के बाहरी कमरे में अलग रखें। उसकी सूचना तत्काल नगर पालिका, ग्राम प्रधान, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को दें। उधर, लॉकडाउन का यहां पूरा असर रहा। पुलिस अधीक्षक डा. एसएस मीणा ने भी जायजा लिया। एसडीएम सौरभ शुक्ला, सीओ टीपी द्विवेदी व इंस्पेक्टर रवींद्र तिवारी भी भ्रमण पर रहे।
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कोरोना के कहर का असर जनजीवन तक ही नहीं सीमित, खेत में खड़ी फसलें भी इससे प्रभावित हो रही हैं। लॉकडाउन के बाद खेतिहर मजदूरों के घरों से निकल न पाने या पड़ोसी जिलों से न आ सकने से किसानों को फसल काटने के लिए कटाई मजदूर ढूंढे नहीं मिल रहे। कटाई के लिए तैयार फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। मौसम में भी रोजाना बदलाव के बादल मंडरा रहे हैं।
यहां क्षेत्र में चना, अरहर, मसूर की अधिकांश फसलें तैयार हो गई हैं। इन्हें जल्द ही काटने की दरकार है। ऐसे खेतों में इक्का दुक्का खेतिहर मजदूर फसल काटते नजर आ रहे हैं। उधर, तिंदवारी क्षेत्र में बरसात और ओला से 15 फीसदी तक नुकसान बताया गया है। जो बची हैं उन्हें काटने के लिए मजदूरों के लाले है। लॉकडाउन में मजदूर नहीं मिल रहे। चना, मटर, सरसों की फसलें तैयार है। किसानों को चिंता है कि इस बीच बारिश या ओला फिर गिरे तो बची कुची फसल भी जाएगी। संवाद
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