बांदा। जनपद में डेढ़ दर्जन आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण अटक गए हैं। पूर्व में तय की गई कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि लागत (इस्टीमेट) कम है। इसके बाद यह बजट ग्राम पंचायतों को सौंपने का फैसला हुआ। लेकिन अब तक पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों के खातों का नंबर आदि नहीं उपलब्ध कराया है। इससे दो साल से भवन निर्माण नहीं शुरू हो सका।
जनपद में 1705 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें सिर्फ 279 के पास ही खुद का भवन है। शेष केंद्र सामुदायिक भवन, परिषदीय विद्यालय व किराये के भवनों में चल रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में शासन ने 16 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी थी। प्रति भवन आठ लाख छह हजार रुपये मंजूर किए थे। निर्माण का दायित्व आरईएस को सौंपा गया था। जिला कार्यक्रम विभाग ने उसे 32 लाख रुपये भी जारी कर दिए थे, लेकिन आरईएस ने भवन की लागत राशि कम बताकर निर्माण से इनकार कर दिया।
आरईएस के इनकार के बाद पिछली जुलाई को जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था नियुक्त करते हुए आंगनबाड़ी भवनों का पैसा उनके खाते में भेजने के आदेश दिए थे। जिला कार्यक्रम विभाग ने जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से ग्राम पंचायतों से खाता नंबर उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा। लेकिन आज तक पंचायती राज विभाग कार्यक्रम विभाग को खाता नंबर नहीं उपलब्ध करा सका। अलबत्ता दो वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
इनसेट-
यहां बनने हैं आंगनबाड़ी भवन
बड़ोखर ब्लॉक में बक्छा, फुल्ला का पुरवा। कमासिन ब्लॉक में लखनपुर, बिनवट। महुआ ब्लॉक में तरखरी, छितारी का पुरवा। तिंदवारी ब्लॉक में हुकुम सिंह का डेरा, दतरौली। बबेरू ब्लॉक में शिवनंदन का पुरवा। नरैनी ब्लॉक में बनई गौतमपुर, मूड़ी। बिसंडा ब्लॉक में सिकलोढ़ी, डड़ियन पुरवा। जसपुरा ब्लॉक में सिकहुला, सोना मऊ, बरेहटा।
इनसेट-
निर्माण में होंगे 8.6 लाख खर्च
आंगनबाड़ी भवन निर्माण की कुल लागत 8 लाख 6 हजार रुपये निर्धारित है। इसमें मनरेगा से तीन लाख रुपये खर्च होंगे। दो लाख जिला कार्यक्रम विभाग और एक लाख 6 हजार ग्राम पंचायतों को खर्च करना है। भवन में दो कमरे, शौचालय, रसोई, स्टोर रूम आदि बनाए जाएंगे।
वर्जन-
डीपीआरओ को आंगनबाड़ी भवन निर्माण की धनराशि हस्तांतरण के लिए ग्राम पंचायतों का खाता नंबर उपलब्ध कराने के लिए कई बार पत्र भेजा गया है। लेकिन पंचायती राज विभाग खाता संख्या उपलब्ध नहीं करा रहा है। इससे निर्माण अटका है। - सुधीर कुमार, एसडीएम सदर/प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी, बांदा
--------------
वर्जन-
-----------
ग्राम पंचायतों के खाते व्यक्तिगत निधियों के लिए होते हैं। इनमें आंगनबाड़ी का पैसा लेने का कोई प्राविधान नहीं है। शासन से खाता नंबर उपलब्ध कराने के लिए मार्गदर्शन मांगा गया है। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। - वंश बहादुर, परियोजना प्रबंधक, पंचायती राज विभाग, बांदा