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मौजूदा विधायक सहित दल बदलकर चुनाव लड़े प्रत्याशी हारे

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बांदा। दलबदल कर चुनाव जीत विधायक बनने की मंशा से रण में कूदे प्रत्याशियों के दिल मतदाताओं ने तोड़ दिए। दूसरे दलों से टिकट हथिया कर चुनाव लडने वालों को हार का सामना करना पड़ा। इनमें तिंदवारी सीट से मौजूदा विधायक और पूर्व विधायक की पत्नी भी शामिल हैं। हालांकि दोनों रनर प्रत्याशी रहे।
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पिछले 2017 के चुनाव में तिंदवारी सीट से भाजपा के टिकट पर बृजेश प्रजापति पहली बार विधायक चुने गए थे। उनके राजनीतिक गुरु स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़कर सपा में आने के बाद विधायक बृजेश भी इस्तीफा देकर सपा में शामिल हो गए। सपा ने उन पर भरोसा जताते हुए तिंदवारी सीट से प्रत्याशी बनाया।
‘साइकिल’ पर सवार होकर चुनाव लड़े बृजेश प्रजापति 28,425 वोटों से भाजपा प्रत्याशी रामकेश निषाद से हार गए। उन्हें 58,387 वोट मिले थे। उधर, बांदा सदर सीट में विवेक कुमार सिंह (अब स्वर्गीय) चार बार कांग्रेस से विधायक रहे। उनकी पत्नी मंजुला सिंह ने सपा की सदस्यता लेकर सदर सीट से चुनाव लड़ा।
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मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी प्रकाश द्विवेदी ने उन्हें 15,214 वोट से पराजित कर दिया। मंजुला को कुल 66,343 वोट मिले थे। इसी तरह नरैनी (सुरक्षित) सीट में बसपा से आईं किरन वर्मा को भी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की ओममणि वर्मा ने किरन को 6719 वोटों से हराया।
किरन 76,544 वोट पाईं। हालांकि तीनों सीटों पर भाजपा और सपा की कड़ी टक्कर रही। लेकिन मतदाताओं का भाजपा के प्रति रुझान भारी पड़ा। कमोवेश यही हालत चित्रकूट में रही। चित्रकूट सदर सीट के बसपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह कांग्रेस छोड़कर आए थे। वह 38,711 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। दूसरी सीट मानिकपुर में भाजपा छोड़कर बसपा से चुनाव लड़े बलवीर पाल 45,091 पाकर हार गए। वह भी तीसरे स्थान पर रहे।
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