बांदा। 10 दिन पूर्व घर से लापता हुए किसान का शव गांव के नजदीक कुएं में मिला। वह बैंक के कर्ज को लेकर परेशान था। कर्ज की रकम डेढ़ से 2 लाख रुपये हो गई थी। बैंक दबाव बना रहा था। पुलिस भी परिजनों के हवाले से यह बात कह रही है। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया।
पैलानी थाना क्षेत्र के चंदवारा गांव निवासी सुखराम निषाद (55) 8 अप्रैल को घर से लापता हो गए थे। सोमवार को कुएं से दुर्गंध आने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कुएं में ट्यूबवेल से पानी भरवाकर शव बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम किया गया। किसान बेटे संदीप ने बताया कि पिता सुखराम ने वर्ष 2014 में आर्यावर्त बैंक से 1.50 लाख रुपये कर्ज लिया था। तमाम किसानों का कर्ज माफ हो गया। लेकिन उनका माफ नहीं हुआ। हाल ही में वह बैंक गए तो पता चला कि कर्ज की रकम 2 लाख हो गई है। इधर, बैंक भी उन पर कर्ज चुकता करने का दबाव बना रहा था। आपसी समझौते के तहत 90 हजार रुपये जमा करने के लिए बांदा गए तो आधार कार्ड न होने से फाइल रिजेक्ट कर दी गई। जिससे वह और परेशान हो गए और आत्महत्या कर ली।
उधर, शाखा प्रबंधक नेपाल कुमार का कहना है कि किसान पर दो लाख का कर्ज था। लेकिन कर्ज के लिए बैंक ने कोई दबाव नहीं बनाया। किसान खुद ही 90 हजार रुपये जमा करने को तैयार था। इसके लिए उन्हें क्षेत्रीय कार्यालय बांदा भेजा गया था।
उधर, ग्राम प्रधान अरविंद सिंह का कहना है कि बैंक पूरा कर्ज अदा करने का दबाव बना रहा था। किसान के पास कुल दो एकड़ जमीन है। थानाध्यक्ष नंदराम प्रजापति ने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। मामले की जांच की जा रही है। तहसीलदार के निर्देश पर लेखपाल ने भी जांच कर ग्रामीणों के बयान लिए। तहसीलदार तिमराज सिंह का कहना है कि जांच की जा रही है।