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मंडल को मिले पांच और ट्रांसफार्मर

Mon, 18 Jan 2016 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। बुंदेलखंड के दौरे पर आए मुख्य सचिव को बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायतें मिलीं थीं। लखनऊ पहुंचकर मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पावर कारपोरेशन के अफसरों के पेंच कसे हैं। इस पर शासन ने तत्काल 33 केवी की तीन लाइनें चित्रकूटधाम मंडल के लिए मंजूर कर दीं।
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उधर, पखवारे भर पूर्व यहां आकर निरीक्षण कर गए कारपोरेशन के निदेशक (डिस्ट्रीब्यूशन) एससी भारती और निदेशक (ट्रांसमिशन) सतांशु अग्रवाल फिर यहां आए।

रविवार की शाम दोनोें अफसरों ने चित्रकूटधाम मंडल के पावर कारपोरेशन अधिकारियों के साथ बैठक की। मंडलायुक्त से भी मिले। तत्काल प्रभाव से बांदा में पांच नए ट्रांसफार्मर और लगाने का निर्णय लिया है। हाल ही मेें 10 सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई जा चुकी है।

दिसंबर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बुंदेलखंड की बिजली दुरुस्त करने के लिए जारी सख्त आदेशों के बाद पावर कारपोरेशन बिजली व्यवस्था सुधारने में जुटा है।
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29 दिसंबर को कारपोरेशन के दो निदेशकों ने यहां आकर 220 केवी सब स्टेशन की 127.5 केवीए आपूर्ति को बढ़ाकर 139.5 केवीए करा दिया था।

हाल ही में प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने महोबा और बांदा का निरीक्षण किया। बांदा में रात्रि विश्राम भी किया। अधिकारियों के साथ बिजली की समीक्षा की।

मुख्य अभियंता और अधीक्षक अभियंता को दोटूक चेतावनी दी थी कि तीन दिन के अंदर लो-वोल्टेज समस्या का समाधान नहीं हुआ तो निलंबन के लिए तैयार रहें।

मुख्य सचिव ने लखनऊ लौटकर चित्रकूटधाम मंडल के लिए 33 केवीए की तीन नई लाइनों को मंजूरी दी। इन पर तेजी से काम शुरू हो गया है।

रविवार को यहां आए कारपोरेशन के दो निदेशकों ने मंडल के सभी अधीक्षण और अधिशासी अभियंताओं के साथ बैठक की। मुख्य अभियंता एके सक्सेना भी उपस्थित थे।

निदेशकों को बताया कि हाल ही में मंडल के 10 सब स्टेशनों में नए ट्रांसफार्मर लगाकर उन्हें चालू कर दिया गया है। साथ ही अभियंताओं ने बांदा और हमीरपुर के लिए पांच और ट्रांसफार्मरों की मांग की।

इनमें 10 एमवीए के तीन और पांच एमवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मर शामिल हैं। निदेशक भारती ने बताया कि ट्रांसफार्मराें की मांग तत्काल स्वीकृत कर ली गई है। चार दिन के अंदर ट्रांसफार्मर गाजियाबाद और जयपुर से यहां आ जाएंगे।

निदेशक ने यह भी बताया कि शासन द्वारा स्वीकृत 33 केवी की तीनों लाइनें 18 फरवरी तक बनकर तैयार हो जाएंगी। ये लाइनें बांदा जनपद में औगासी से कमासिन (26 किलोमीटर), औगासी से बबेरू (20 किलोमीटर) और चिल्ला से पलरा (20 किलोमीटर) शामिल हैं। इन पर तेजी से काम चल रहा है। अगले माह पूरा हो जाएगा। तीनों लाइनों पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च आएगा।

तमाम कोशिशों के बाद भी पावर कारपोरेशन मुख्यमंत्री की मंशा के मुताबिक गांवों को 24 घंटे बिजली नहीं दे पा रहा। इसमें ओवरलोडिंग आड़े आ रही है।

मुख्य सचिव के निरीक्षण और सुधार के लिए दी गई चेतावनी के बाद गांवों में अभी ओवरलोडिंग के चलते की जा रही कटौती को रोकने के आदेश दिए गए हैं।

इसके बदले मेें गैर कृषि क्षेत्रों में कटौती होगी। पावर कारपोरेशन (डिस्ट्रीब्यूशन) निदेशक एससी भारती ने बताया कि सब स्टेशनों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है, लेकिन लगातार गांवों को पूरे समय बिजली देना मुश्किल है।

ओवरलोडिंग की वजह से कुछ घंटों के लिए गांवों में कटौती की जा रही थी। अब निर्देश दिया गया है कि कटौती करना जरूरी हो तो उन क्षेत्रों मेें की जाए, जहां सिंचाई न होनी हो।

 ओवरलोडिंग पावर कारपोरेशन के लिए चुनौती बन गई है। शासन के दबाव के बावजूद गांवों को 24 घंटे तो दूर 20 घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही।

इस बारे में कारपोरेशन निदेशक (ट्रांसमिशन) का कहना है कि 33 केवी की नई लाइनें बन जाने के बाद कमासिन (बांदा) स्थित 132 केवीए सब स्टेशन में कुछ लोड बांटा जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि निर्माणाधीन 400 केवीए सब स्टेशन के तैयार होने के बाद ही चित्रकूटधाम मंडल में ओवरलोडिंग की समस्या से राहत मिलेगी। निदेशक ने दावा किया कि 50 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे बिजली दी जा रही है। शेष क्षेत्रों में 15 घंटे के आसपास बिजली मिल रही है।

20 घंटे बिजली के दावोें को अधिकांश ग्रामीणों ने गलत बताया है। नरैनी क्षेत्र के शहबाजपुर गांव के किसान रामशरण पटेल ने बताया कि बमुश्किल 12 घंटे बिजली मिल रही है।

4-5 घंटे दिन में 6-7 घंटे रात में। गांव में दो नलकूप हैं। भरपूर बिजली न मिलने से पूरी सिंचाई नहीं हो पा रही। बांदा शहर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित कनवारा गांव के किसान जयराम सिंह ने भी 12-13 घंटे बिजली मिलने की बात की।

चिल्ला क्षेत्र के अतरहट गांव के कृष्ण बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि दिन में चार और रात को सात घंटे ही बिजली मिल पाती है। इनमें अक्सर वोल्टेज डाउन रहने से नलकूप नहीं चल पाते।

लुकतरा गांव के बउवा पांडेय ने बताया कि बिजली की अधिकतम 12 घंटे ही आपूर्ति हो रही है। वह भी कई चरणों में। रात को ज्यादा मिलती है। ठंड में खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
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