करतल। बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर में चल रही गिद्धों की रेडियो टैगिंग टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी। दुर्लभ प्रजाति का लाल सिर गिद्ध (रेड हेडेड वल्चर) हाथ लगा है। टीम ने इसे टैग लगाकर खुले आसमान में छोड़ दिया। पलक झपकते यह ऊंची उड़ान भरते हुए यह नजरों से ओझल हो गया।
देश में पहली बार हो रही गिद्धों की टैगिंग बुंदेलखंड से शुरू हुई है। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भारतीय वन्य जीव निगम संस्थान, देहरादून के विशेषज्ञों की टीम पिछले सप्ताह से गिद्धों की रेडियो टैगिंग कर रही है। लगभग 25 गिद्धों को रेडियो टैग लगाया गया है।
इसकी विस्तृत खबर 8 दिसंबर को अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। टीम को बांदा जनपद से जुड़ी मध्य प्रदेश की सीमा में गहरी घाटी के झालर घास मैदान में लाल सिर का गिद्ध हाथ लगा है। टीम ने इसे पिजड़े से पकड़ा। टैगिंग के बाद छोड़ दिया। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि टैगिंग से गिद्धों के रहवास, प्रवास, उनके रास्ते, रहन-सहन आदि के बारे में जानकारियां मिलेंगी।
भारतीय उप महाद्वीप का है लाल सिर का गिद्ध
बांदा/करतल। लाल सिर वाला गिद्ध भारतीय उप महाद्वीप में पाया जाता है। इसके पंखों का फैलाव दो से ढाई मीटर और वजन साढ़े तीन किलो से सवा 6 किलो तक होता है। लंबाई 76 से 86 सेंटीमीटर होती है। इसे एशियाई राजा गिद्ध, भारतीय काला गिद्ध और पांडिचेरी गिद्ध भी कहते हैं।
इन गिद्धों की संख्या बहुत कम रह गई है। इंटरनेशनल यूनियन फार कनजर्वेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) ने इसे विलुप्तप्राय पक्षी की श्रेणी में रख दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह पतझड़ जंगल, छोटी पहाड़ियों और नदी घाटियों में पाया जाता है।
Tagging team's hand is rare red head vulture- फोटो : BANDA