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गोशालाओं में दलदल, कीचड़ से सने मिले मवेशी

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Swamps, mud-soaked cattle found in cowsheds - फोटो : BANDA
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बांदा। गोशालाओं की हकीकत देखने आए नोडल अधिकारियों को दलदल और तमाम खामियां मिलीं। कीचड़ से सने गोशाला में संरक्षित अन्ना मवेशियों को देखकर हैरानी जताई। ज्यादातर गोशालाओं में भूसे में मिलाया जाने वाला पोषाहार नदारद मिला। यह स्थिति ज्यादातर गोशालाओं की रही। निरीक्षण के बाद नोडल अधिकारी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे।
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बुंदेलखंड में अन्ना मवेशियों के संरक्षण और उनके बेहतर देखभाल के उद्देश्य से गोशालाओं की हकीकत जानने के लिए शासन से नामित नोडल अधिकारियों ने पड़ताल शुरू कर दी हैं। नोडल अधिकारियों ने पांच दिन में चित्रकूटधाम मंडल की 400 से अधिक स्थायी/अस्थायी गोशाला, कान्हा गोशाला, कांजी हाउस सहित वृहद गो संरक्षण केंद्रों की जांच पड़ताल की। ज्यादातर गोशालाओं में टिनशेड, सफाई नहीं मिली। कीचड़ की समस्या ज्यादा रही। दलदल में मवेशी बैठ नहीं पा रहे। बारिश के मौसम में कीचड़
से सने पशु कांपते मिले। गोशालाओं में भूसा तो पर्याप्त मिला, लेकिन संतुलित पशु आहार कना, नमक आदि नदारद था। नोडल अधिकारियों को पशु संख्या के सापेक्ष गोशालाओं में गोवंशों के बैठने की व्यवस्था, आवागमन, बिजली समस्या अधिक मिली। यह जांच अभियान दो अगस्त तक चलेगा।
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इनसेट
मंडल में गोशालाओं का सत्यापन
जिला गोशाला
बांदा 140
चित्रकूट 110
महोबा 99
हमीरपुर 88
योग 437
नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी
बांदा। बांदा में राजीव धीर डिप्टी सीवीओ (रायबरेली), महोबा में सुरेंद्र कुमार डिप्टी सीवीओ (महोबा), चित्रकूट में गोपेश श्रीवास्तव डिप्टी सीवीओ (चित्रकूट) और हमीरपुर में सोम तिवारी डिप्टी सीवीओ (हमीरपुर) नियुक्त किए गए हैं।
गोशालाओं में फैल सकता है संक्रामक रोग
बांदा। नोडल अधिकारी राजीव धीर ने बताया कि सिंधन कलां गोशाला में छोटे-बड़े पशुओं के खाने व पानी के पीने के लिए अलग-अलग चरही नहीं है। दीवार में कंटीले तार नहीं लगे। मटौंध कान्हा गोशाला में 346 गोवंश संरक्षित हैं। यहां कीचड़ की स्थिति अत्यंत गंभीर है। ऐसे में संक्रामक रोग फैल सकते हैं। तिंदवारी कान्हा गोशाला में पशुओं के सापेक्ष बैठने व छाया की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा पपरेंदा, रामपुर, खप्टिहा कलां, निवाइच, लामा, मकरी, मूंगुस गांव में स्थित गोशाला की जांच की गई। भूसे का भंडारण पर्याप्त मात्रा में पाया गया।
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