बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते बांदा राजकीय मेडिकल कॉलेज में संचालित सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की क्षमता बढ़ेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इसे विकसित किया जाएगा। इसमें लगभग 40 लाख रुपये खर्च होंगे। महानिदेशक (परिवार एवं कल्याण) ने चार माह पूर्व एनएचएम से क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसमें कोरोना महामारी आड़े आ गई और बजट जारी नहीं हो सका।
बांदा राजकीय मेडिकल कालेज में मौजूदा में एसएनसीयू में चार बेड हैं, जबकि आम दिनों में यहां रोजाना पांच से आठ 8 प्रसव का औसत है। ऐसे में यहां जन्में बच्चों को बेड की कमी से जूझना पड़ता था। उन्हें जिला महिला अस्पताल में स्थित केयर यूनिट या प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (परिवार एवं कल्याण) महानिदेशक ने जनवरी माह में पत्र भेजकर मिशन के जरिए एसएनसीयू में बेड सहित अन्य सुविधाएं बढ़ाए जाने से अवगत कराया था, लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर में इसका विकास लटक गया।
इस बाबत मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि लगभग 40 लाख रुपये बजट से एसएनसीयू की क्षमता बढ़ाकर 12 बेड किया जाना है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी से निपटने की तैयारियों के चलते केयर यूनिट को विकसित में लेटलतीफी हुई। जून माह में बजट आने की उम्मीद है। बजट मिलते ही वॉर्मर आदि खरीदे जाएंगे। इसके लिए मैन पावर भी अलग होगा। बताया कि शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए एसएनसीयू को विकसित किया जा रहा है।
इन्हें किया जाता सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट में भर्ती---
समय से पहले जन्म होने, कम वजन हो, पैदा होने पर रोया न हो, पीलिया होने पर, सांस लेने में तकलीफ, पेट में सूजन या तनाव, बच्चे को ज्यादा पेशाब होना, पल्स बढ़ना, ऑक्सीजन की कमी, जन्म के समय दूध न पीना, हाथ-पैर नीले पड़ना, झटके आना, गंदा पानी पी लेना आदि समस्या होने पर बच्चे को वार्मर में रखकर इलाज किया जाता है।
बच्चों के लिए बदले जाएंगे वेंटिलेटर के सॉफ्टवेयर
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की संभावनाओं को लेकर की जा रहीं तैयारियों के बीच जुगाड़ व्यवस्था भी चल रही है। बानगी के तौर पर मेडिकल कालेज में बनाए गए पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में वयस्क श्रेणी के वेंटिलेटर बच्चों के इलाज में इस्तेमाल किए जाएंगे। हालांकि, दावा किया जा रहा कि सॉफ्टवेयर बदलने के बाद ही इन वेंटिलेटरों का इस्तेमाल होगा। मेडिकल कॉलेज में पीआईसीयू 100 बेड का बनाया जा रहा है। इसमें 50 बेड आइसोलेशन और इतने ही बेड आईसीयू में बच्चों के लिए होंगे। बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले वेंटिलेटर अलग होते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में मौजूदा वेंटिलेटर ही पीआईसीयू में लगाए जाएंगे।
एमआरआई भवन तैयार, बिना उपकरण बेकार
जिला अस्पताल परिसर में निर्मित एमआरआई भवन करीब सालभर से बिना उपकरण शोपीस बना है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. उदयभान सिंह ने विधायक प्रकाश द्विवेदी को पत्र देकर एमआरआई (मैगनेटिक रिजॉनेंस इमेजिंग) मशीन स्थापित कराने का अनुरोध किया है। उधर, विधायक का कहना है कि जल्द एमआरआई सुविधा और मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट तैनाती के लिए शासन से अनुरोध किया है। पीपीपी मॉडल के तहत जिला अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित होना है। इसके लिए लगभग 96.87 लाख रुपये लागत से भवन तैयार है, लेकिन अब तक मशीन न लगने से यह शोपीस बना है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि सदर विधायक के प्रयासों से एमआरआई मशीन स्थापना की मंजूरी मिली थी। भवन तैयार होने के बाद अब तक मशीन न आने पर उन्होंने हाल ही में हुई स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित बैठक में विधायक को पत्र देकर मशीन स्थापित कराने का अनुरोध किया है। यह भी दलील दी कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते मशीन स्थापना में विलंब हुआ है। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने स्वीकार किया कि सीएमएस के पत्र पर उन्होंने शासन से जल्द एमआरआई सुविधा शुरू कराने का अनुरोध किया है। एमआरआई भवन तैयार होने से भी अवगत कराया है। साथ ही बताया कि मेडिकल कॉलेज में एमआरआई, सिटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे आदि सुविधाओं के लिए प्रयासरत हैं। यहां हरेक विभाग में स्पेशलिस्ट की तैनाती के लिए भी सीएम से अनुरोध किया है। प्रक्रिया चल रही है। दो से तीन माह में यहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं होंगी।
सॉफ्टवेयर बदलने के बाद ही इन वेंटिलेटरों को बच्चों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकेगा। भेल कंपनी के इंजीनियरों की टीम को वेंटिलेटर में सॉफ्टवेयर अपलोड करने आना है। सॉफ्टवेयर बदलने और टेस्टिंग होने के बाद वेंटिलेटर पीआईसीयू में लगा दिए जाएंगे।
-डा. मुकेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य, राजकीय मेेडिकल कॉलेज बांदा