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लापरवाही से सूख गए लाखों के कीमती सोलह हजार पौधे

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बांदा। बुंदेलखंड को हराभरा बनाने के लिए प्रदेश सरकार की तमाम कोशिशों को अफसर ही पलीता लगा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा नूप योजना के तहत मंगाए गए लाखों रुपये के पौधे मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में कूड़े की तरह पड़े-पड़े सूख गए। इनमें अधिकांश नीम, महुआ, आम, आंवला आदि के पौधे थे।
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यह पौधे भूमि संरक्षण विभाग की परियोजनाओं में लगने थे। पौधों की कीमत लगभग चार लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है। इस बाबत कृषि विभाग और भूमि संरक्षण विभाग अलग-अलग दलीलें दे रहा है। संयुक्त उप कृषि निदेशक ने जांच की बात कही है।
कृषि विभाग ने पिछले सप्ताह भूमि संरक्षण विभाग की परियोजनाओं में पौधरोपण के लिए नूप योजना के तहत करीब चार लाख 64 हजार रुपये से 16 हजार पौधे एक प्राइवेट कंपनी के माध्यम से आजमगढ़ से मंगाए गए थे।
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इनमें नीम, महुआ, आम, आंवला आदि के पौधे ज्यादा थे, लेकिन यह पौधे मिट्टी परीक्षण विभाग की प्रयोगशाला में कूड़े के ढेर की तरह रख दिए गए। देखरेख नहीं की गई। इस लापरवाही ने पौधों को सुखा दिया। नतीजे में अब पौधों के अवशेष के रूप में सूखी टहनियां और मिट्टी के धेले मात्र बचे हैं।
खास बात यह है कि प्रयोगशाला के ठीक बगल से संयुक्त उप कृषि निदेशक कार्यालय है। भूमि संरक्षण विभाग ने कागजों पर सभी पौधे परियोजनाओं में रोपित करा दिए। इस संबंध में उप निदेशक (कृषि) विजय कुमार का कहना है कि पौधे भूमि संरक्षण विभाग को रोपण के लिए दिए गए थे।
उन्होंने इन पौधों का क्या किया, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। दूसरी तरफ भूमि संरक्षण अधिकारी सौरभ यादव का कहना है कि कृषि विभाग से प्राप्त पौधे किसानों को लगाने को दे दिए गए।
प्रयोगशाला में पौधे कैसे सूखे, इस पर दोनों अधिकारी चुप्पी साध गए। संयुक्त उप कृषि निदेशक उमेश कटियार का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि पौधों का रोपण नहीं हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
आंकड़ों में हरियाली, असलियत कुछ और
सरकारी आंकड़ों में पौधरोपण के जरिए बुंदेलखंड हर साल हरा-भरा हुआ, लेकिन असलियत कुछ और है। करोड़ों की संख्या में पौधे रोपे गए, लेकिन बुंदेलखंड में हरियाली सिर्फ फाइलों में ही आई।
इस वर्ष चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में दो करोड़ 9 लाख 32 हजार 657 पौधरोपण का लक्ष्य शासन ने तय किया था, जबकि पिछले वर्ष 2020-21 में एक करोड़ 80 लाख 83 हजार पौधे रोपे गए थे।
चारों जिलों में पौधरोपण करोड़ों की संख्या में हो गए। फिर भी हरियाली का नामोनिशान नहीं है।
पिछले दो वर्षों में हुए पौधरोपण का ब्योरा
जनपद 2020 2021
बांदा 36,71,000 44,53,250
चित्रकूट 51,24,000 55,18,515
हमीरपुर 52,10,000 55,30,987
महोबा 40,78,000 54,29,905
योग- 1,80,83,000 2,09,32,657
15 फीसदी ही पनप पाते हैं पौधें
शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक, महोत्सव के रूप में पौधे रोपे गए, लेकिन हर साल बमुश्किल 15 से 20 फीसदी पौधे ही पनप पाते हैं। अधिकांश पौधे देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं या फिर सुरक्षात्मक उपाय न होने से मवेशी चट कर जाते हैं।
राष्ट्रीय वन नीति पर चित्रकूटधाम मंडल खरा साबित नहीं हो पा रहा। वन नीति के मुताबिक, 33 प्रतिशत भूभाग में वन होना चाहिए, लेकिन मौजूदा में बांदा में 1.80 प्रतिशत, चित्रकूट में 21.66 प्रतिशत, हमीरपुर में मात्र 3.6 प्रतिशत और महोबा में 4.50 प्रतिशत भूभाग में वन क्षेत्र है।
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