बांदा। बुंदेलखंड में मोटे अनाज के छह प्रोसेसिंग प्लांट अगले साल तक तैयार हो जाएंगे। इनके भवन निर्माण का काम शुरू हो गया। बांदा में प्रोसेसिंग प्लांट कृषि विश्वविद्यालय में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र में बनेगा। इसके लिए भूमि पूजन किया जा चुका है। प्लांट लगने से किसान मोटे अनाजों की पैकिंग कराकर अच्छी आमदनी ले सकेंगे।
बुंदेलखंड मोटे अनाज के उत्पादन की दृष्टि से बेहद मुफीद माना जाता है। सभी सात जिलों में करीब दो लाख हेक्टेयर में ज्वार, बाजरा, सांवा, कोदो आदि की फसलें होती हैं। सरकार की ओर से यहां किसानों को मोटे अनाज के उत्पादन के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभी किसानों को मोटे अनाजों से अच्छी आमदनी नहीं होती है। कृषि विश्वविद्यालय ने मोटे अनाज से लड्डू, बिस्किट आदि बनवाकर इनकी पैकिंग करने की तैयारी की है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के तहत बुंदेलखंड के छह जनपदों में मोटे अनाज के प्रोसेसिंग प्लांट लगवाए जा रहे हैं। इनमें बांदा भी शामिल है। यहां पर कृषि विश्वविद्यालय में प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना के लिए भूमि पूजन किया जा चुका है। एक प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना पर करीब 95 लाख रुपये खर्च होंगे। इस तरह छह प्लांटों में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह प्लांट एक साल में बनकर तैयार हो जाएंगे।
बुंदेलखंड में प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना बांदा, हमीरपुर, ललितपुर, महोबा, जालौन और झांसी में हो रही है। प्रत्येक यूनिट की लागत 95 लाख रुपये है। प्रोसेसिंंग भवन के निर्माण का दायित्व कार्यदायी संस्था सीएनडीएस सौंपा गया है।
किसानों को ऐसे होगा लाभ
प्लांट में अत्याधुनिक प्रोसेसिंग मशीनें लगेंगी। किसानों के मोटे अनाज की पैकेजिंग होगी और उन्हें मार्केटिंग की सहूलियत मिलेगी। कृषि विश्वविद्यालय इसे पहचान देकर किसानों को मोटे अनाज की बिक्री को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें उपज का सही मूल्य मिल सके।
उच्च गुणवत्ता के मिलेंगे बीज
कृषि विज्ञान केंद्र की डाॅ. दीक्षा का कहना है कि प्रोसेसिंग प्लांटों के जरिए किसानों को मोटे अनाज के उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। उपज की पैकेजिंग व मार्केटिंग भी कराई जाएगी। ताकि उनकी आमदनी में इजाफा हो।