दो बीघा खुद की और 5 बीघा बटाई की जमीन पर बोई गई फसल बारिश और ओलावृष्टि से मिट्टी में मिल जाने से दुखी किसान खेत के पास ही पेड़ पर रस्सी के सहारे फांसी पर झूल गया। खेतीबाड़ी के अलावा वह पंजाब में मजदूरी भी करता था। दस दिन पहले वह गांव आया था और 5 दिन पहले ही बेटी के लिए लड़का देखने के बाद वह उसकी शादी पर होने वाले खर्चे को लेकर परेशान था।
ओरन गांव के दंगलहा पुरवा में मन्नूलाल रैदास (50) परिवार के साथ रहता था। पुत्र राममिलन ने बताया कि पिता मन्नूलाल खेतीबाड़ी के अलावा घर के खर्चे पूरे करने के लिए पंजाब में मजदूरी भी करते थे। 10 दिन पहले ही वे पंजाब से लौटे थे। वापस आने के बाद खेत की हालत देखकर वे परेशान हो उठे।
रोजाना खेत जाते और गुमसुम होकर वहीं खेत की मेड़ पर बैठे रहते। कई बार उन्होंने परिवार के बीच फसल चौपट होने का दुख भी जताया। खेती और घर खर्च के लिए गांव के कुछ साहूकारों से 50 हजार रुपये कर्ज भी ले रखा था। पुत्र राममिलन के मुताबिक उसकी एक बहन की शादी हो चुकी है। पिता को दूसरी बेटी श्यामा की शादी की चिंता थी।
5 दिन पहले वे लड़का देखने बबेरू गए थे। इधर, फसल न होने से शादी की बात आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सुबह करीब साढ़े 10 बजे कुछ लोगों ने बताया कि पिता ने खेत के किनारे यूकेलिप्टस के पेड़ पर फांसी लगा ली है। पिता ने सुसाइड से पहले अपनी आंखों पर साफा बांध लिया था।
सूचना पर ओरन चौकी प्रभारी राकेश पाल मौके पर पहुंचे और पेड़ से शव को नीचे उतरवाया। लेखपाल ने भी मौके पर आकर अधिकारियों को सूचना दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उधर, उप जिलाधिकारी (अतर्रा) आरके श्रीवास्तव ने की वह मृतक किसान के घर पहुंच रहे हैं। मृतक के परिजनों ने बातचीत करेंगे। नियमों के तहत जो भी संभव होगा मृतक के आश्रितों को मदद दिलाया जाएगा।