अतर्रा। अन्ना मवेशियों के संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे, फिर भी लगाम नहीं लग रही। हाईवे से लेकर गांव की गलियों, खेतों और स्कूलों के मैदानों में मवेशियों के झुंड मंडरा रहे हैं। इसकी बानगी कस्बे के नरैनी रोड में स्थित प्राइमरी स्कूल है।
हालत यह है कि अन्ना पशुओं के जमघट से स्कूल परिसर गोशाला में तब्दील नजर आ रहा है। यहां पर आधा सैकड़ा से अधिक पशु पूरे दिन बैठे रहते हैं। गंदगी और सड़ांध का आलम है। शाम होते ही यह खेतों की ओर रुख कर जाते हैं। फसलों को नुकसान पहुंचाने से किसान परेशान हैं। जिले में अन्ना मवेशियों के संरक्षण के लिए 223 स्थायी व अस्थायी गोशाला संचालित हैं।
पशुपालन विभाग डेढ़ लाख से अधिक पशुओं के संरक्षण का दावा कर रहा है। इसके बाद भी हजारों की संख्या में अन्ना मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं। आए दिन सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। कस्बे के लाल थोक (नरैनी रोड) में स्थित प्राइमरी विद्यालय के मैदान में आधा सैकड़ा से अधिक अन्ना मवेशी डेरा डाले हैं।
किसानों का कहना है कि शाम होते ही मवेशी खेतों में धावा बोलकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सुबह होते ही मवेशी स्कूल मैदान आ जाते हैं। अफसरों से कई बार अन्ना मवेशियों को पालिका द्वारा तुर्रा गांव में बनाई गई कान्हा गोशाला में भेजने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप लगाया कि यहां गोशाला कागजों में चल रही है। सैकड़ों पशु बंद दर्शाए जा रहे, पर हकीकत कुछ और है। लल्ला सिंह, संजय तिवारी, कल्लू, राजा भैया, रामजी, धीरू तिवारी, रोहित गर्ग, रवि दुबे आदि किसानों ने डीएम को पत्र भेजकर अन्ना मवेशियों को कान्हा गोशाला भिजवाने की मांग की है।