बांदा। उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास महापरिषद और पंचायतराज विभाग कर्मचारी संगठन के बीच पाला खिंच गया है। एक ओर जहां पंचायती राज विभाग कर्मियों ने 10 व 17 जून को धरने का एलान किया वहीं ग्राम्य विकास विभाग कर्मियों ने इसके विरोध में दोनों दिन दो घंटे अधिक काम करने का संकल्प लिया।
गुरुवार को ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास महापरिषद के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव को सौंपा। ज्ञापन में कहा है कि पंचायत राज विभाग और पंचायत राज संस्थाएं अलग-अलग हैं। पंचायत राज विभाग अपने को पंचायती राज संस्था के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। यह पंचायती राज संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास है।
केंद्र व प्रदेश सरकारें अधिकांश योजनाएं बीडीओ की देखरेख में संचालित कर रही हैं। कुछ वर्षों से बीडीओ के अधिकार कम होते गए और जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। नतीजे में पंचायती राज विभाग ने बीडीओ के नियंत्रण व समन्वय शक्ति पर सीधे प्रहार करना शुरू कर दिया। 10 व 17 जून को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन का एलान किया है। ग्राम पंचायत अधिकारियों को बीडीओ के नियंत्रण से मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञापन देने वालों में डीडीओ श्रीकृष्ण त्रिपाठी, पीडी आरपी पाठक, महापरिषद जिलाध्यक्ष बीडीओ ओपी शुक्ला, महामंत्री बीडीओ वीरेंद्र यादव, वीडीओ प्रमोद द्विवेदी, अब्दुल शफीक, अजीज मंसूरी, प्रदीप निगम, कौशल किशोर दीक्षित, गुलाम मुस्तफा, अब्दुल वहीद, सगीर अहमद समेत सभी बीडीओ व विकास विभाग व डीआरडीए कर्मचारी शामिल रहे।