बांदा। मंडल मुख्यालय में महानगरों से लौट रहे प्रवासियों के सैंपल लेने की व्यवस्था बेहद गड़बड़ा गई है। बड़ी संख्या में प्रवासी बिना सैंपलिंग अपने गांव पहुंच रहे हैं। यह कभी भी महामारी के बड़े वाहक बन सकते हैं।
हालात यह हैं कि मौजूदा समय में न्यूनतम लगभग दो सौ प्रवासी मजदूर रोजाना आ रहे हैं, जबकि जिले के इकलौते सैंपलिंग सेंटर नरैनी सीएचसी में मात्र 25 सैंपल ही रोज लिए जा रहे हैं। जाहिर है कि रोजाना लगभग पौने दो सैकड़ा प्रवासी मजदूर बिना सैंपलिंग के घरों को पहुंच रहे हैं।
यहां राजकीय मेडिकल कालेज में सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ/झांसी भेजने की व्यवस्था थी। 12 मई से यहां के स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्था बदल दी। मेडिकल कालेज में सैंपल लेने की व्यवस्था खत्म कर दी। मंडल मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर नरैनी सीएचसी को सैंपल सेंटर बना दिया।
अब स्थिति यह है कि महानगरों से लौट रहे बड़ी तादाद में मजदूर जिला अस्पताल रोज आ रहे हैं। इनमें तमाम मजदूरों में बीमारी के लक्षण महसूस होने पर अस्पताल के डाक्टर उन्हें सैंपल के लिए नरैनी रेफर कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन रेफर लोगों को नरैनी पहुंचाने का कोई वाहन आदि का इंतजाम नहीं किए है।
उधर, लॉकडाउन में बसें व अन्य वाहन भी नहीं चल रहे। ऐसे में रेफर मरीज सैंपल देने नरैनी नहीं जा पा रहे। वह अपने घरों को वापस चले जाते हैं। जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे मामले नजर आ रहे हैं। बिना सैंपल के संदिग्ध लोग गांव में कभी भी महामारी का तांडव फैला सकते हैं।
उधर, इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार का कहना है कि मेडिकल कालेज कोविड-19 हॉस्पिटल घोषित हो चुका है। वहां सिर्फ भर्ती मरीजों का इलाज और सैंपल होगा। जिला अस्पताल में सैंपल की व्यवस्था फिलहाल नहीं है। रेफर मरीज संपर्क करें तो एंबुलेंस से नरैनी पहुंचाया जा सकता है।
बड़ी संख्या में बिना सैंपल कराए रेफर मरीजों के गांव लौट जाने के सवाल पर सीएमओ का कहना था कि वह जिलाधिकारी से वार्ता करके जिला अस्पताल या मेडिकल कालेज में सैंपल लेने की व्यवस्था कराने का प्रयास करेंगे।