बांदा। स्वास्थ्य विभाग में जीपीएफ फर्जीवाड़े की जांच फिलहाल आगे की कार्रवाई के निर्देश के इंतजार में रुकी है।
प्रयागराज की ऑडिट टीम हमीरपुर में संबंधित अभिलेखों की पड़ताल कर रही है। बांदा में दो दिन जांच के बाद टीम बुधवार को हमीरपुर पहुंची थी। टीम के शनिवार को बांदा लौटकर सीएमओ कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच करने की संभावना है।
प्रयागराज लेखा विभाग की टीम ने सोमवार और मंगलवार को अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय में सेवा पुस्तिका, जीपीएफ अभिलेख, पासबुक और अन्य रिकॉर्ड का मिलान किया था। जांच में जीपीएफ खातों से रकम की निकासी और अभिलेखों में हेरफेर से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही थी।
प्रकरण में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तिंदवारी में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार के जीपीएफ खाते से 70 लाख रुपये से अधिक का ऋण लिए जाने का मामला सामने आया था।
जांच में खाते में इतनी रकम जमा नहीं होने की बात सामने आई थी। महोबा स्वास्थ्य विभाग में तैनात लिपिक संतोष कुमार वर्मा पर भी 85 लाख रुपये के गबन का आरोप सामने आया था। आरोप है कि जीपीएफ खातों में हेरफेर कर रकम निकाली गई। बांदा में जांच के बाद टीम हमीरपुर रवाना हुई थी। शुक्रवार को टीम के बांदा लौटने की बात थी लेकिन नहीं पहुंची