घर में इफ्तार करता रोजदार परिवार।
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बांदा। रमजान माह का हर दिन और हर पल आम महीनों या दिनों जैसा नहीं है। इस माह का हर लम्हा बेहद अहम है। इसकी कद्र करनी चाहिए। रोजे की शर्तें और पाबंदियों पर अमल करने से ही रोजा वाकई रोजा होगा।
मौलाना मोहम्मद स्वालेह आजमी कासमी कहते हैं कि रमजान माह हर इंसान के लिए रहमत और मुबारक दिन वाला है। रोजा और तरावीह और तिलावत इसकी खास इबादत हैं। जायज और हलाल कमाई से सहरी व इफ्तार करके रोजे की दीगर शर्तों को पूरा करने से ही रोजदार को असली फायदा मिलता है।
उन्होंने कहा कि यह महीना हमदर्दी का है। हर इंसान से हमदर्दी होनी चाहिए। यहां तक कि जानवरों के साथ भी हमदर्दी से पेश आएं। इस माह की कद्र और एहतेराम कर लिया गया तो इसकी बरकत से साल के दीगर 11 महीने भी नूरानी बीतेंगे। अल्लाह के नजदीक सिर्फ भूखा रहना ही रोजा नहीं।
रोजे के दौरान झूठ, चुगली, बेईमानी, घटतौली, रिश्वतखोरी, हरामकारी, अश्लील हरकतें इत्यादि सभी कुछ मना और हराम है। साथ ही गरीबों की भरपूर मदद भी जरूरी है। मौलाना स्वालेह ने कहा कि अब रमजान माह का आखिरी अशरा शुरू हो रहा है यह सबसे अहम है। यह अशरा जहन्नम से निजात दिलाता है। इसी अशरे में शबे कद्र की रातें हैं।
मौलाना मोहम्मद सालेह आजमी।- फोटो : BANDA