बांदा। लॉकडाउन के बीच मजदूरों को गांव में ही काम मुहैया कराने में चित्रकूटधाम मंडल ने प्रदेश में अलग पहचान बनाई है। मंडल के चित्रकूट जिले को पूरे प्रदेश में पहला स्थान मिला है। पिछले 13 दिनों में महोबा और चित्रकूट में दोगुना, बांदा में ढाई गुना और हमीरपुर में तीन गुना से ज्यादा मजदूर लगाए गए हैं।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने मनरेगा मजदूरों और उन्हें मिले कामों का प्रदेश सरकार द्वारा जारी प्रदेश स्तरीय आंकड़ों का हवाला देकर बताया कि चित्रकूट जिला पूरे प्रदेश में मनरेगा कार्यों और मजदूरी में अव्वल रहा। यहां का राज्यस्तरीय औसत 117.5 प्रतिशत है। हमीरपुर का राज्य औसत 90.90 प्रतिशत, महोबा का राज्य स्तर पर औसत 81.81 प्रतिशत और बांदा का राज्य औसत 64.89 रहा। मंडलायुक्त ने बताया कि 29 अप्रैल से 12 मई तक चारों जिलों में मनरेगा कार्यों में मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ी है।
मंडल में पहले दिन (29 अप्रैल) को 1286 ग्राम पंचायतों में 50,820 मजदूर लगाए गए थे। रोजाना इनकी संख्या में इजाफा होता रहा। मंगलवार (12 मई) को यह आंकड़ा बढ़कर 1313 ग्राम पंचायतों में 1,14,812 मजदूरों को मजदूरी तक पहुंच गया। मौजूदा समय में बांदा जिले में 471 में 424, चित्रकूट में 335 में 329, महोबा 273 में 233 और हमीरपुर में 330 में 327 ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य चल रहे हैं।
बांदा में 27,515, चित्रकूट में 38,511, महोबा में 19,062 और हमीरपुर में 29,724 मजदूरों को काम मिल चुका है। मंडलायुक्त ने बताया कि बुधवार (13 मई) को मंडल में सर्वाधिक 2681 मजदूरों की वृद्धि बांदा जिले में हुई है। आयुक्त ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को काम में लगाए जाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।