बांदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 19 नवंबर को महोबा में होने वाली रैली में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी चित्रकूटधाम मंडल प्रशासन ने बखूबी संभाल ली है। भाजपा नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता इससे सुकून में नजर आ रहे हैं। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के नाम पर मंडल की सभी 1389 ग्राम पंचायतों से लाभार्थी/ग्रामीणों को जनसभा स्थल पर जुटाने के लिए प्रधान, सचिव और कोटेदारों को लगाया गया है।
यह टीम हर ग्राम पंचायत से कम से कम 50 ग्रामीणों का जत्था भेजेगी। इसके चलते यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकारी मशीनरी मंडल के चारों जिलों से लगभग दो लाख से ज्यादा भीड़ जुटा लेगी।
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम पूरी तरह सरकारी है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया जाना है। ऐसे में आयोजन की सारी जिम्मेदारियां और खर्च शासन-प्रशासन उठा रहा है। आम तौर पर भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की रहती है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महोबा जनसभा में भीड़ जुटाने का जिम्मा सरकारी अमले ने खुद संभाल लिया है। चारों जिलों के प्रत्येक गांव में ग्राम स्तरीय कर्मचारी से लेकर मंडलायुक्त और पुलिस महानिरीक्षक तक इसमें जुटे हुए हैं।
महोबा के डीएम का पत्र इसकी बानगी है, जिसमें उन्होंने प्रदेश के सड़क परिवहन निगम को पत्र भेजकर 1600 बसें मांगी हैं। पत्र में कहा है कि इनका भाड़ा सिंचाई विभाग अदा करेगा। डीएम के इस पत्र में साफ लिखा है कि जनसभा स्थल पर आम जनमानस को लाने और ले जाने के लिए इन बसों की जरूरत है।
विधान सभा चुनाव के पहले संभवत: बुंदेलखंड में प्रधानमंत्री का इतना बड़ा कार्यक्रम शायद आखिरी हो। ऐसे में सत्ता पक्ष भी भाजपा का भगवा लहराने में मददगार साबित होने वाले इस आयोजन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही।
प्रधानमंत्री की महोबा रैली में चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों की सभी 1389 ग्राम पंचायतों से प्रत्येक से चार छोटे वाहन जाएंगे। प्रत्येक वाहन में 10 लोग होंगे। इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बताया जा रहा है। कुल वाहनों की संख्या 5556 बताई जा रही है। यानी एक गांव से 40 लोगों की भागीदारी होगी। इसके अलावा चारों जिलों से 213 बसें ले जाने की भी तैयारी है। प्रत्येक बस में कम से कम 50 लोग होंगे। यानी इन वाहनों से लगभग 1.40 लाख लोग पहुंचेंगे। इनके अलावा विभिन्न विभागों ने अपने लाभार्थियों के लिए छोटे-बड़े वाहन अलग से किए हैं। मनरेगा, पशु पालन, आपूर्ति इत्यादि विभाग अपने लाभार्थियों को पहुंचाने के लिए वाहनों का बंदोबस्त कर रहा है।