बांदा। जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति खेल बजट में ‘खेल’ कर रही है। समिति के पांच साल के बजट के आंकड़े यहीं बता रहे हैं। खेलों को प्रोत्साहन के लिए बनी यह समिति खेल प्रोत्साहन से चार गुना ज्यादा मानदेय पर खर्च कर रही है। चार साल में खेल उपकरणों पर पौने चार लाख रुपये तो खेल प्रतियोगिताओं पर मात्र 49 हजार रुपये खर्च किए गए हैं। उधर, चालू वित्तीय वर्ष में प्रोत्साहन समिति ने कोई आयोजन नहीं किए, जबकि समिति के बजट में 15 लाख रुपये जमा हैं।
जिले में खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति बनी है। समय-समय पर इसका पुनर्गठन होता है। समिति के क्रियाकलापों की जानकारी लेने के लिए समाजसेवी कुलदीप शुक्ला ने जनसूचना अधिकार अधिनियम में पांच साल वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक के खर्च और आय का ब्योरा मांगा था, जिसे जिला क्रीड़ाधिकारी ने उपलब्ध कराया है।
पांच साल के विवरण में खिलाड़ियों के प्रोत्साहन पर समिति ने मात्र वर्ष 2015-16 में 5 हजार रुपये खर्च किए थे। इसके बाद प्रोत्साहन के नाम पर कोई गतिविधि नहीं हुई। अलबत्ता पांच साल में खेल उपकरणों पर 3 लाख 74 हजार 200 रुपये खर्च बताए गए हैं। खेल प्रतियोगिताओं पर 49 हजार 110 रुपये और पुरस्कार पर 26 हजार 540 रुपये खर्च बताए हैं।
प्रोत्साहन समिति द्वारा खर्च पैसे का वर्षवार ब्योरा
वर्ष 2015-16 : उपकरण क्रय 44,690 रुपये, मानदेय 20,000, खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 10,000, प्रतियोगिता पर 7150, निर्माण पर 20,225, खिलाड़ी प्रोत्साहन को 5000, कलक्ट्रेट कर्मचारियों को 10,000, खेल उपकरण 36,000, पुरस्कार 45140 रुपये।
वर्ष 2016-17 : आश्रम पद्धति विद्यालय को उपकरण 16,620, दृष्टि बाधित विद्यालय को उपकरण 98,540 व 12,660, केंद्रीय विद्यालय दुरेड़ी को उपकरण 99,150 रुपये।
वर्ष 2017-18 : कलक्ट्रेट कर्मियों की प्रतियोगिता को 10,000, सोफासेट, मेज, कुर्सी को 71,936 व 72,640, समरसेबुल पंप 41,600, टेबल टेनिस बाल, राकेट मेट, 9,262, खिलाड़ियों के जूते 19,200, बैडमिंटन रैकेट व शटल काक 18,178 रुपये।
वर्ष 2018-19 : प्रतियोगिता हेतु पुरस्कार खरीद 3360 रुपये।
वर्ष 2019-20 : खिलाड़ियों को टीशर्ट,19,824 रुपये। क्रिकेट नेट 19,900 रुपये।
वर्ष व्यय बैलेंस
2015-16 198,205 17,04,999
2016-17 2,26,970 16,46,637
2017-18 2,42,816 14,64,930
2018-19 3360 15,13,520
2019-20 39,724 14,99,727
योग 7,11,075
उद्देश्य और नियम विरुद्ध खर्च हो रहा बजट
बांदा। जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति के सदस्य/जिला क्रिकेट एसोसिएशन सचिव वासिफ जमां खां का कहना है कि प्रोत्साहन समिति अपने उद्देश्यों से हटकर काम कर रही है। यह नियम विरुद्ध है। समिति का उद्देश्य गरीब और उदीयमान खिलाड़ियों की फीस, खेल किट, प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था करना है। समिति के पैसे से निर्माण कार्य और सबमर्सीबल पंप खरीद जैसे कार्य नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो खेल उपकरण व सामग्री ली गई है, उसके लिए समिति को जानकारी ही नहीं हो पाई। न ही टेंडर हुए और न ही गुणवत्ता देखी गई। कहा कि आमतौर पर प्रोत्साहन समिति के बजट को क्रीड़ाधिकारी अपनी पाकेट मनी मानकर अपनी स्वेच्छा से खर्च करते रहते हैं। समिति के पदेन अध्यक्ष डीएम है। यह भी सवाल उठाया कि समिति का 1995 से नवीनीकरण नहीं हुआ। ऐसे में समिति कैसे कार्य कर सकती है? इन सभी कार्यों की जांच होनी चाहिए।
15 लाख बजट के बाद भी प्रतिभाओं को मदद नहीं
आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला का कहना है कि यह अफसोस और गंभीर बात है कि जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति 15 लाख रुपये का बजट रखे बैठी है, लेकिन इसे खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन पर खर्च नहीं किया जा रहा है। बुंदेलखंड और खासकर बांदा में उभरते और प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में समिति के बजट से किशोर और युवाओं को खेल के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।