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लामा गांव में फैला बुखार, डेंगू का डर

Sun, 20 Sep 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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मंडल मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर लामा गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीण बुखार मेें चपेट में हैं। कई की हालत गंभीर है। बीमारों को डेंगू का डर सता रहा है। शनिवार को गांव पहुंची डॉक्टरों की टीम ने करीब सौ लोगों के खून के नमूने लिए।
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इधर देखा जा रहा है कि महानगरों से लौटने वाले मजदूर आदि में डेंगू के लक्षण पाए जा रहे हैं। अस्पताल मेें भी बुखार के मरीज रोज बढ़ रहे हैं। लगभग 8 हजार की आबादी वाले लामा गांव में कई दिनों से बुखार फैला हुआ है।

कुछ मरीजों में डेंगू जैसे लक्षणों की बात कही जा रही है। सूचना पर शनिवार को मुख्य चिकित्साधिकारी ने डॉक्टरों की टीम गांव भेजी। गांव में फागिंग कराई गई। टीम ने किसी भी मरीज की डेंगू किट से जांच नहीं की। सिर्फ मलेरिया मानकर ब्लड नमूना लेकर स्लाइड बना ली।
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उधर, स्थानांतरित सीएमओ कैप्टन आरके सिंह ने बताया कि एमबीएस डॉक्टर के नेतृत्व में लामा गांव टीम भेजकर स्लाइड बनवाईं गईं हैं। सीएमओ डॉक्टर और टीम के सदस्यों का नाम नहीं बता सके। बोले-यह सब याद नहीं रहता।

एक और बालिका को डेंगू
बांदा जनपद में डेंगू पीड़ित मरीजों का मिलना जारी है। पिछले माह तीन मरीजों के बाद दो दिन पूर्व बबेरू क्षेत्र के मरका गांव में दो युवकों में डेंगू के लक्षण पाए गए। अब बदौसा क्षेत्र के तुर्रा गांव में बालिका मुस्कान (12) में डेंगू की पुष्टि हुई है। पिता अकबर अली ने बताया कि बेटी को बुखार आ रहा था। अतर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराए जाने पर उसमें डेंगू के लक्षण पाए गए। वहां से जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां से रविवार को कानपुर रेफर किया गया।

सात दिन बुखार पर कराएं डेंगू की जांच
जिले में डेंगू की दस्तक के बाद बुखार के रोगियों में दहशत है। इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि कुछ सावधानियां बरत ली जाएं तो इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है। किसी को सात दिन से ज्यादा बुखार आए तो तुरंत डेंगू की जांच करानी चाहिए।

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. विनीत सचान का कहना है कि हर बुखार डेंगू नहीं होता। डेंगू के लक्षणों में ब्लड प्रेशर लो, नब्ज धीमी, हाथ पैर ठंडे, सांस लेने में दिक्कत, कुछ खा लेने पर उल्टी, शरीर में लाल चकत्ते आदि लक्षण पैदा होते हैं। इसके बाद तुरंत योग्य चिकित्सक के पास जाना चाहिए। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है।

बुखार के रोगियों में इन मरीजों का प्रतिशत एक फीसदी होता है। हर बुखार को डेंगू समझकर भयभीत हों। डेंगू से पीड़ित उन मरीजों को अधिक खतरा रहता है, जिन्हें दोबारा ये बीमारी हुई। छोटे बच्चे, वृद्ध व गर्भवती को डेंगू की आशंका ज्यादा रहती है।

डॉ. सचान के मुताबिक दिल के मरीज जो दवाएं लेते हैं, उन्हें बुखार होने पर सावधानी बरतने की जरूरत है। डेंगू के लक्षण मिलने पर सूमो, डिस्प्रिन, एस्प्रिन, कांबिफ्लेम, ब्रूफेन जैसी दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें।

डेंगू का मच्छर घर में पैदा न हो इसके लिए घर में या आसपास पुराने बर्तन टायर व कूलर में पानी न जमा होने दें। कूलर का पानी भी रोजाना बदलते रहें। घर व आसपास की सफाई का विशेष ध्यान रखें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। शिकंजी और जूस पीने से इसमें विशेष राहत मिलती है।

सांड़ा गांव में डायरिया से कई बच्चे बीमार
बबेरू तहसील क्षेत्र के सांड़ा गांव में इन दिनों डायरिया का प्रकोप है। यहां के शिवदत्त के पुत्र भानू प्रताप (8) व मोहन (2), साधू (5) पुत्र शिवबहादुर, अनुराग (6) पुत्र शिव सिंह, रोशनी (6) पुत्री ललित पांडेय, कल्लू (5) पुत्र सुखराज प्रजापति, हरदेव (7) पुत्र कल्लू का इलाज बबेरू के एक प्राइवेट अस्पताल में किया जा रहा है।

कांग्रेस जिला महासचिव रामानुज भौंरहा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी टीम नहीं पहुंची। उधर, बबेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्साधीक्षक डॉ. पीएन यादव ने सांड़ा गांव में डायरिया फैलने से अनभिज्ञता जताई। कहा कि सोमवार को स्वास्थ्य टीम गांव भेजेंगे।
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