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आक्सीजन भरपूर, डाक्टरों की कमी नहीं हुई दूर

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बांदा। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में सांस पर संकट हुआ तो सरकार ने ऑक्सीजन उत्पादन प्लांटों पर ताकत झोंक दी। मंडल मुख्यालय में स्थित राजकीय मेडिकल कालेज और मंडलीय अस्पताल को पांच ऑक्सीजन प्लांट मिले, पर सबसे बड़ी डाक्टरों की कमी की समस्या दूर नहीं हुई। मेडिकल कालेज चिकित्सा शिक्षक/डाक्टरों के 51 पद खाली हैं। मनोरोग विभाग में कोई डाक्टर नहीं है। जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में चिकित्साधिकारियों के 10 पद रिक्त हैं।
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कोरोना महामारी के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने पर ध्यान दिया, तो साथ ही बेडों की संख्या भी बढ़ी। पूर्व में गिने-चुने वेंटीलेटर होते थे। मेडिकल कालेज में 130 और जिला अस्पताल में लगभग 25 वेंटीलेटर हो गए। दूसरी लहर में ऑक्सीजन कमी का संकट खड़ा हुआ तो प्लांट लगाकर ऑक्सीजन उत्पादन पर जोर दिया गया।
नतीजे में मंडल के इकलौते राजकीय मेडिकल कालेज और मंडलीय/जिला पुरुष/महिला अस्पताल में 2-2 तथा नरैनी सीएचसी में एक ऑक्सीजन प्लांट है। खपत फिलहाल नाममात्र की है। सरकारों ने ऑक्सीजन संकट की समस्या तो दूर कर दी, पर डाक्टरों का टोटा दूर नहीं हो सका। तमाम विशेषज्ञों के पद खाली हैं। मरीजों को दूसरे जनपदों में जाकर इलाज कराना मजबूरी है।
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