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‘गोमूत्र-गोबर से करें जैविक खेती’, गोष्ठी में चुनिंदा किसानों का जमघट

Wed, 11 Mar 2015 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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‘गाय सिर्फ दूध के उद्देश्य से न पालें बल्कि गोमूत्र व गोबर का भी उपयोग जैविक खेती में करें। इससे शुद्ध जैविक अनाज भी मिलेगा।’
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यह बात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) महानिरीक्षक राजाबाबू सिंह (आईपीएस) ने किसानों और पशु पालकों से कही। वह बुधवार को बड़ोखर ब्लाक सभागार में आयोजित गाय आधारित कृषि विषय पर आयोजित किसान संगोष्ठी में बोल रहे थे।

उन्होंने यह भी कहा कि तंगी के चलते लोग पितरों का पिंडदान नहीं कर पाते। ऐसे लोगों को सितंबर में पितृपक्ष के समय दो बसों से पिंडदान के लिए नि:शुल्क गया (बिहार) भेजा जाएगा।
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इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन भी उन्होंने किया।गोष्ठी में सीकर (राजस्थान) से आए प्रगतिशील किसान कान सिंह ने कहा कि हम हर चीजों की गुणवत्ता का तो विशेष ध्यान रखते हैं, पर रासायनिक उर्वरकों से तैयार जहरीले अनाज का भोजन से परहेज नहीं करते जबकि यह भोजन गंभीर बीमारियों की जड़ है।

ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलपति प्रो.एनसी गौतम ने आर्गनिक खेती का महत्व बताया। कहा कि गाय की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। साथ ही गाय पालन से रासायनिक खादों से बढ़ रही खेती की लागत में कमी आएगी।
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शहडोल से आए प्रगतिशील किसान संतोष शुक्ला ने कहा कि गौ आधारित व्यवस्था ही भारत की प्राण है।

संगोष्ठी को उप निदेशक पशु पालन डॉ.सीडी शर्मा, कुमारगंज (फैजाबाद) विश्व विद्यालय के प्रोफेसर डॉ.हरनाम सिंह, डॉ.भारतेंदु प्रकाश, डॉ.संजय पांडेय, अधिवक्ता राजेद्र सिंह चौहान, कमलेश तिवारी, बसपा नेता जयराम सिंह, रामेंद्र शर्मा, रामेंद्र सिंह भगत व युवा प्रगतिशील किसान पंकज सिंह (खहरा) आदि ने भी संबोधित किया। संचालन डॉ.प्रह्लाद सिंह निरंजन ने किया। 
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